NCC Ltd Share: प्रॉफिट **19%** गिरा, फिर भी शेयरधारकों को मिलेगा डिविडेंड! जानें क्या है वजह

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AuthorAditya Rao|Published at:
NCC Ltd Share: प्रॉफिट **19%** गिरा, फिर भी शेयरधारकों को मिलेगा डिविडेंड! जानें क्या है वजह
Overview

NCC Ltd ने अपने Q4 FY26 के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी के नेट प्रॉफिट में **18.8%** की बड़ी गिरावट देखी गई है। कंपनी का मुनाफा घटकर **₹206 करोड़** रह गया, हालांकि रेवेन्यू में **1.7%** की मामूली बढ़त दर्ज हुई है।

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मार्जिन पर दबाव, मुनाफे पर असर

NCC Ltd के तिमाही नतीजों में सबसे बड़ी चिंता मार्जिन का सिकुड़ना रहा। पिछले साल के मुकाबले इस बार EBITDA मार्जिन घटकर 8.8% रह गया, जो पहले 9.1% था। इसी वजह से, भले ही कंपनी का रेवेन्यू ₹6,232.7 करोड़ तक पहुंच गया, लेकिन शुद्ध मुनाफा 19% लुढ़ककर ₹206 करोड़ पर आ गया। इस मार्जिन दबाव का मतलब है कि कंपनी को लागतें बढ़ानी पड़ी होंगी या फिर उन्होंने ऐसे प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा फोकस किया, जिनसे मुनाफा कम हुआ।

ऑपरेशनल EBITDA में भी गिरावट

कंपनी का ऑपरेशनल EBITDA भी 1.1% घटकर ₹550.4 करोड़ पर आ गया। कच्चे माल, लेबर या प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की बढ़ती लागतों ने मुनाफे को प्रभावित किया है। हाल ही में कंपनी को ₹1,703 करोड़ के नए ऑर्डर मिले हैं, लेकिन फिलहाल की रिपोर्ट बताती है कि रेवेन्यू को मुनाफे में बदलने में चुनौती आ रही है। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए नेट प्रॉफिट ₹675.32 करोड़ रहा, जो पिछले साल से कम है।

सेक्टर में बूम, वैल्यूएशन में नरमी

जहां भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सरकारी खर्च ₹12.2 लाख करोड़ से बढ़ रहा है और इसमें मजबूत ग्रोथ दिख रही है, वहीं NCC का शेयर वैल्यूएशन कुछ अलग कहानी कह रहा है। कंपनी का P/E रेश्यो करीब 13.8x है, जो BSE इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर इंडेक्स (18.3x) और सेक्टर के औसत (20.2x से 31x) से काफी कम है। यह दिखाता है कि निवेशक NCC के मार्जिन प्रदर्शन और लागत प्रबंधन को लेकर कुछ चिंतित हैं। वहीं, Larsen & Toubro (L&T) जैसे बड़े प्लेयर्स का P/E 31.33x है, जबकि Kalpataru Projects International का P/E 24.69x है।

गिरावट के बावजूद डिविडेंड का ऐलान

मुनाफे में कमी के बावजूद, NCC Ltd ने शेयरधारकों को खुश करने के लिए ₹2.20 प्रति शेयर का डिविडेंड प्रस्तावित किया है। यह कंपनी के भविष्य के प्रति विश्वास और शेयरधारकों को रिटर्न देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कंपनी के पास ₹83,004 करोड़ का बड़ा ऑर्डर बुक है, जो अगले तीन सालों के लिए रेवेन्यू का भरोसा दिलाता है।

आगे की राह और जोखिम

NCC के सामने मुख्य चुनौती लगातार बढ़ती लागतों के चलते मार्जिन को बचाए रखना है। बाजार का कम P/E रेश्यो यही संकेत देता है कि निवेशकों को एग्जीक्यूशन या लागत में कमी लाने को लेकर चिंताएं हैं। सरकारी भुगतानों में देरी और कमजोर नतीजे भी चिंता का विषय रहे हैं। हालांकि, एनालिस्ट्स अभी भी कंपनी के लिए 22% से 39% तक के अपसाइड की उम्मीद कर रहे हैं, जो सेक्टर की ग्रोथ और संभावित इंटरेस्ट रेट कट पर निर्भर करता है। कंपनी को इन सब का फायदा उठाने के लिए लागत प्रबंधन और मार्जिन सुधारने पर जोर देना होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.