NCC Share Price: निवेशकों की चिंता बढ़ी! कंपनी का मुनाफा 19% गिरा, ऑर्डर बुक दमदार पर इन वजहों से शेयर पर दबाव

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
NCC Share Price: निवेशकों की चिंता बढ़ी! कंपनी का मुनाफा 19% गिरा, ऑर्डर बुक दमदार पर इन वजहों से शेयर पर दबाव
Overview

NCC Limited के निवेशकों के लिए Q4 FY26 के नतीजे उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल के मुकाबले **19%** गिर गया है। इसके पीछे प्रोजेक्ट्स में देरी, पेमेंट में विलंब और लागत में भारी वृद्धि जैसे कारण सामने आए हैं, जिसने कंपनी के मार्जिन को दबाया है।

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नतीजे क्यों गिरे? लागत का झटका!

NCC Limited ने अपने फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) में 19% की गिरावट के साथ नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। कंपनी के ऑपरेशनल रेवेन्यू में थोड़ी बढ़त हुई और यह ₹6,232.71 करोड़ रहा, लेकिन ग्रॉस और EBITDA मार्जिन 50 और 30 बेसिस पॉइंट घट गए। इसके अलावा, ऊंचे इंटरेस्ट एक्सपेंस और कम हुए 'अन्य आय' (other income) ने भी प्रॉफिट को नीचे खींचा। कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन में धीमी गति और समय पर पेमेंट न मिलना इसकी मुख्य वजहें हैं।

पश्चिम एशिया संकट और सप्लाई चेन की मार

पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर NCC के ऑपरेशंस पर भी दिख रहा है। कंपनी को रॉ मैटेरियल मिलने में दिक्कतें आ रही हैं और इनपुट कॉस्ट में भी भारी उछाल आया है। हालांकि, NCC के 74% कॉन्ट्रैक्ट्स में कॉस्ट एस्केलेशन क्लॉज है, फिर भी यह पूरी बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों से वसूल नहीं कर पाएगी। अनुमान है कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की लागत 5-8% तक बढ़ सकती है, जबकि रियल एस्टेट कंस्ट्रक्शन कॉस्ट 5% तक महंगी हो सकती है। इस अनिश्चितता के चलते सरकारें भी फंड को सब्सिडी की ओर मोड़ सकती हैं, जिससे राज्य के इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के पेमेंट में और देरी हो सकती है। इससे NCC का वर्किंग कैपिटल साइकिल 19 दिनों (FY25) से बढ़कर 30 दिनों (FY26) का हो गया है।

FY27 के लिए गाइडेंस जारी नहीं

इन सब चुनौतियों को देखते हुए, NCC ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए कोई भी फाइनेंशियल गाइडेंस जारी करने से इनकार कर दिया है। मैनेजमेंट का मानना है कि इकोनॉमी और जियोपॉलिटिकल सिचुएशन पर ज्यादा क्लैरिटी आने के बाद ही वे कोई अनुमान लगा पाएंगे। यह अनिश्चितता निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।

₹83,004 करोड़ की ऑर्डर बुक बनी सहारा

हालांकि, निकट भविष्य की चिंताएं हैं, लेकिन NCC के पास मार्च 2026 तक ₹83,004 करोड़ की शानदार ऑर्डर बुक है। यह रकम FY26 के रेवेन्यू का लगभग 4 गुना है, जो मीडियम-टर्म में कंपनी के लिए रेवेन्यू की अच्छी विजिबिलिटी प्रदान करती है। इसमें 95% सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स शामिल हैं। इसके अलावा, ₹2.5 लाख करोड़ की प्रॉस्पेक्टिव पाइपलाइन भी लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की उम्मीद जगाती है।

वैल्यूएशन और पीयर्स पर नजर

फिलहाल ₹161 के करीब ट्रेड कर रहे NCC का मार्केट कैप लगभग ₹10,000-10,100 करोड़ है। इसका TTM P/E रेश्यो 13.5x से 17x के बीच है। अगर इसकी तुलना दिग्गज Larsen & Toubro (L&T) से करें, जिसका P/E 31x है, तो NCC का वैल्यूएशन आकर्षक लगता है। लेकिन, प्रतिस्पर्धी PNC Infratech का P/E करीब 10.23x है। एनालिस्ट्स ने भी अपनी राय बदली है; NCC को 'Overweight' से 'Equal Weight' पर डाउनग्रेड किया गया है और टारगेट प्राइस में भी कटौती की गई है।

बड़े जोखिम और निवेशक क्या करें?

NCC के सामने सबसे बड़ी चुनौती पेमेंट में लगातार हो रही देरी है, जिससे वर्किंग कैपिटल और फाइनेंसिंग कॉस्ट पर दबाव बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया संकट से मटेरियल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन में बाधाएं प्रोजेक्ट्स के मार्जिन को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही हैं। FY27 के लिए गाइडेंस न देना यह दर्शाता है कि मैनेजमेंट भी वर्तमान अनिश्चितताओं को लेकर आशंकित है। बड़ी ऑर्डर बुक होने के बावजूद, इन ऑर्डर्स को मुनाफे में बदलना एक बड़ी चुनौती है। पिछले कुछ सालों में शेयर में आई अस्थिरता (volatility) निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ाती है।

आगे की राह: सावधानी जरूरी

NCC Limited के लिए निकट भविष्य में अनिश्चितता बनी रहने की उम्मीद है। पेमेंट में देरी, बढ़ते खर्च और गाइडेंस की कमी जैसे कारक अभी भी कंपनी के सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकते हैं। मजबूत ऑर्डर बुक का फायदा भविष्य में मिल सकता है, लेकिन निवेशकों को फिलहाल सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। एनालिस्ट्स की हालिया डाउनग्रेड इसी ओर इशारा करती है।

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