NCC Limited Share Price: ऑर्डर बुक **43%** की छलांग पर, पर रेवेन्यू और मुनाफे में आई गिरावट!

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Author Aditya Rao | Published at:
NCC Limited Share Price: ऑर्डर बुक **43%** की छलांग पर, पर रेवेन्यू और मुनाफे में आई गिरावट!
Overview

NCC Limited के लिए मिली-जुली खबरें सामने आई हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक एक साल पहले के मुकाबले **43%** बढ़कर **₹79,571 करोड़** हो गया है। वहीं, इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू **9%** गिरकर **₹4,900 करोड़** रहा, और कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में **37%** की बड़ी गिरावट आई, जो **₹122 करोड़** पर आ गया।

ऑर्डर बुक में बंपर ग्रोथ, पर नतीजों पर लगी ग्रहण

NCC Limited की Q3 FY26 की फाइनेंशियल रिपोर्ट में एक तरफ जहां कंपनी के ऑर्डर बुक में शानदार उछाल दिखा है, वहीं दूसरी ओर रेवेन्यू और मुनाफे में गिरावट चिंता का विषय है। कंपनी का कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक 43% की जोरदार तेजी के साथ ₹79,571 करोड़ पर पहुंच गया है। इस तिमाही में कंपनी को ₹12,430 करोड़ के नए ऑर्डर मिले, और 9 महीने की अवधि में कुल ₹22,311 करोड़ के ऑर्डर आए हैं, जो भविष्य की कमाई के लिए अच्छी नींव है।

रेवेन्यू और मुनाफे में क्यों आई गिरावट?

हालांकि, कंपनी का टॉप-लाइन प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 9% घटकर ₹4,900 करोड़ पर आ गया। स्टैंडअलोन रेवेन्यू में तो 14% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह ₹4,082 करोड़ रहा।

मुनाफे की बात करें तो कंसोलिडेटेड EBITDA ₹436 करोड़ रहा, जो 9% के मार्जिन पर है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कंसोलिडेटेड PAT पिछले साल की इसी तिमाही के ₹193 करोड़ की तुलना में 37% लुढ़क कर ₹122 करोड़ पर आ गया। स्टैंडअलोन PAT भी ₹185 करोड़ से गिरकर ₹82 करोड़ पर पहुंच गया।

9 महीने की अवधि (31 दिसंबर 2025 तक) के लिए, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹14,693 करोड़, EBITDA ₹1,286 करोड़ और PAT ₹469 करोड़ रहा।

मैनेजमेंट की नई रणनीति और चुनौतियाँ

कंपनी का मैनेजमेंट अब 'कनवर्जन एफिशिएंसी' (Conversion Efficiency) और 'वर्किंग-कैपिटल मैनेजमेंट' (working-capital management) पर ज्यादा फोकस कर रहा है, बजाय इसके कि सिर्फ 'नजदीकी अवधि में रेवेन्यू को बढ़ाया जाए'। मैनेजमेंट ने माना है कि पेमेंट साइकल्स (payment cycles) और प्रोजेक्ट अप्रूवल्स में देरी की वजह से कैश फ्लो (cash flow) पर अस्थायी असर पड़ा है, और वर्किंग कैपिटल (working capital) में ज्यादा पैसा फंसा है।

आगे क्या?

कंपनी के लिए बड़ी चुनौती यह है कि वह अपने मजबूत ऑर्डर बुक को रेवेन्यू में कैसे बदल पाती है और एग्जीक्यूशन (execution) को कितना बेहतर बनाती है। मैनेजमेंट का नया फोकस लॉन्ग-टर्म में फायदेमंद हो सकता है, लेकिन फिलहाल इसमें कुछ अनिश्चितता बनी हुई है। कनवर्जन साइकल्स को सामान्य करना और वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट को सुधारना कंपनी के लिए सबसे अहम होगा। Q3 FY26 के अंत तक, कंसोलिडेटेड आधार पर कंपनी पर ₹3,949 करोड़ का नेट डेट (Net Debt) था।

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