पेमेंट में आई तेजी, बदलेगा NCC का हाल?
NCC Limited के लिए वित्तीय वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) काफी अहम रहने वाली है। कंपनी को जल जीवन मिशन (JJM) प्रोजेक्ट्स के रुके हुए भुगतान मिलने शुरू हो गए हैं। यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि इससे पहले प्रोजेक्ट क्लियरेंस में देरी और JJM पेमेंट में रुकावट के चलते कंपनी के कामकाज और बैलेंस शीट पर दबाव था। दिसंबर 2025 तक कंपनी पर JJM प्रोजेक्ट्स का कुल ₹3,700 करोड़ का बकाया था, जिसमें से ₹560 करोड़ जनवरी 2026 में मिल चुके हैं। अब फरवरी और मार्च 2026 में और बड़ी रकम आने की उम्मीद है, जिससे कंपनी की लिक्विडिटी (तरलता) में काफी सुधार होगा।
यह पैसा NCC के वर्किंग कैपिटल साइकल को बेहतर बनाने और नेट डेट (Net Debt) को कम करने में मदद करेगा। आपको बता दें कि पेमेंट में देरी और कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) बढ़ने के कारण Q3 FY26 तक कंपनी का नेट डेट पिछले साल के मुकाबले करीब ₹1,650 करोड़ बढ़ गया था। शेयर की बात करें तो, अभी यह लगभग ₹156 पर ट्रेड कर रहा है, जिसका मार्केट कैप करीब ₹9,801 करोड़ है। साल 2025 की शुरुआत से अब तक यह शेयर 44% तक गिर चुका है, जबकि इसी दौरान निफ्टी 50 में 7% का उछाल आया है। यह दिखाता है कि निवेशकों की चिंता कंपनी के वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट और पेमेंट साइकल पर निर्भरता को लेकर थी।
एनालिस्ट्स की राय और सेक्टर को सहारा
फिलहाल, NCC Limited का शेयर अपने अनुमानित FY27 की कमाई के मुकाबले लगभग 11 गुना P/E (Price-to-Earnings) पर ट्रेड कर रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की दूसरी कंपनियों की बात करें तो, Larsen & Toubro (LT) का P/E करीब 33.56 है और मार्केट कैप काफी बड़ा है। PNC Infratech का P/E 14.1 से 15.83 के बीच है। वहीं, KNR Constructions का P/E करीब 7.87 से 9.10 है और इसका रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 20% से ज़्यादा है, जो NCC के लगभग 11% ROE से काफी बेहतर है।
NCC के पास ₹79,571 करोड़ की मजबूत ऑर्डर बुक है, जो उसके अनुमानित FY26 रेवेन्यू का लगभग 3.9 गुना है। यह कंपनी के लिए अच्छी रेवेन्यू विजिबिलिटी (Revenue Visibility) दिखाता है। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने FY27 के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर कैपिटल एक्सपेंडिचर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया है, जो पिछले साल से 8.1% ज़्यादा है। साथ ही, जल जीवन मिशन (JJM) के लिए बजट आवंटन FY26 के ₹17,000 करोड़ से बढ़कर FY27 में ₹67,670 करोड़ हो गया है। यह सब संकेत देता है कि सरकार ठेकेदारों जैसे NCC को भुगतान में तेजी लाएगी। इन सरकारी पहलों और प्रोजेक्ट्स की वजह से EPC सेक्टर में भी तेजी की उम्मीद है।
पेमेंट पर निर्भरता और मुनाफे का दबाव
हालांकि, Q4 FY26 में सुधार की उम्मीद है, लेकिन NCC के बिजनेस मॉडल में सरकारी पेमेंट साइकल पर निर्भरता का जोखिम बना हुआ है। कंपनी लगातार पांच तिमाहियों से कमजोर नतीजे पेश कर रही है। Q3 FY26 में रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 9% गिर गया था। JJM प्रोजेक्ट्स से पेमेंट में देरी एक पुरानी समस्या रही है, जिसके कारण Q3 FY26 तक वर्किंग कैपिटल डेज़ बढ़कर 119 दिन हो गए थे और बकाया देनदारियां (Outstanding Data) बढ़कर ₹3,543.55 करोड़ हो गईं।
इस पेमेंट निर्भरता ने कंपनी के कर्ज और ब्याज खर्च पर लगातार दबाव डाला है, जो Q3 FY26 में 19% बढ़ गया था। EBITDA मार्जिन कॉस्ट कंट्रोल की वजह से 80 बेसिस पॉइंट सुधरा, लेकिन नेट प्रॉफिट में 37% की भारी गिरावट आई। इसका एक कारण नए लेबर कोड के तहत कर्मचारी प्रोविजन (Employee Provisions) के लिए ₹34 करोड़ का एक्सेप्शनल चार्ज (Exceptional Charge) भी रहा। कंपनी का ROE भी 11% के आसपास है, जो KNR Constructions जैसे कुछ प्रतिस्पर्धियों से कम है। पिछले साल नेट डेट में ₹1,650 करोड़ की वृद्धि इस बात को दर्शाती है कि लंबी पेमेंट साइकल के कारण कंपनी पर वित्तीय दबाव बढ़ा है।
भविष्य की राह और एनालिस्ट्स का भरोसा
NCC Limited का मैनेजमेंट का कहना है कि Q4 FY26 में कामकाज (Execution) में काफी तेजी आएगी और यह Q4 FY25 के रेवेन्यू स्तरों के बराबर हो सकता है। FY26 के पहले नौ महीनों में 9% की गिरावट के मुकाबले यह एक बड़ी रिकवरी होगी। FY27 से ग्रोथ में और तेजी आने की उम्मीद है, जिससे शेयर की रेटिंग में सुधार हो सकता है। एनालिस्ट्स का नजरिया फिलहाल पॉजिटिव बना हुआ है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका कंसेंसस प्राइस टारगेट मौजूदा बाजार मूल्य ₹156.47 के आसपास है, और वे निवेशकों को 'बाय' (Buy) या 'ऐड' (Add) रेटिंग की सलाह दे रहे हैं। इसका मुख्य कारण Q4 में अपेक्षित तेजी, मजबूत ऑर्डर बुक विजिबिलिटी और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च में बढ़ोतरी है।