गुजरात के Morbi सिरेमिक हब पर गहरा संकट मंडरा रहा है। नेचुरल गैस की कीमतें **₹90 प्रति SCM** तक पहुंचने से 900 में से करीब आधी इकाइयां बंद या आंशिक रूप से संचालित हैं। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में एक्सपोर्ट में **70%** की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
संकट की वजह क्या है?
सिरेमिक मैन्युफैक्चरिंग में नेचुरल गैस का उपयोग भट्टियों (kilns) को चलाने के लिए किया जाता है, जो कुल उत्पादन लागत का 35% से 40% हिस्सा है। गैस के दाम ₹90 प्रति SCM तक पहुंचने से छोटे मैन्युफैक्चरर्स की कमर टूट गई है। नतीजतन, क्षेत्र की 900 से अधिक इकाइयों में से 50% या तो पूरी तरह ठप हैं या बहुत कम क्षमता पर चल रही हैं।
एक्सपोर्ट और मार्जिन पर असर
कीमतें संभालने के लिए कंपनियों ने टाइल्स के दाम में 30% से 40% तक की बढ़ोतरी की, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन, तुर्की और दक्षिण अफ्रीका से मिल रही प्रतिस्पर्धा के कारण यह दांव उल्टा पड़ गया। इस संकट का असर एक्सपोर्ट आंकड़ों पर साफ दिख रहा है, जिसमें 70% की बड़ी गिरावट आई है।
बड़े बनाम छोटे खिलाड़ी
यह संकट सेक्टर में दो अलग-अलग तस्वीरें दिखा रहा है:
- बड़ी कंपनियां: इन्होंने भारत के अलग-अलग हिस्सों में अपनी मैन्युफैक्चरिंग को डायवर्सिफाई कर रखा है, जिससे ये जोखिम को संभालने में कामयाब रहीं। इनका ऑपरेटिंग मार्जिन 18% से 19% के स्तर पर बना हुआ है।
- छोटी इकाइयां: ये पूरी तरह Morbi क्लस्टर पर निर्भर हैं, जिससे इनका मार्जिन लुढ़ककर 4% से 6% के निचले स्तर पर आ गया है।
आगे की राह
फ्रेट रेट्स में बढ़ोतरी और वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल अस्थिरता ने हालात और चुनौतीपूर्ण बना दिए हैं। अब निवेशकों की नजर इस पर है कि क्या यह संकट इंडस्ट्री में कंसोलिडेशन (Consolidation) का कारण बनेगा, जहां बड़े खिलाड़ी बाजार में अपनी हिस्सेदारी और मजबूत करेंगे।
