भारत के सिरेमिक हब 'Morbi' के लिए मुश्किल वक्त आ गया है। लॉजिस्टिक्स संकट और बढ़ते शिपिंग खर्च के चलते इस साल एक्सपोर्ट **₹20,000 करोड़** से गिरकर **₹12,000 करोड़** पर सिमट सकता है।
गुजरात का Morbi क्लस्टर इस समय एक गंभीर संकट से जूझ रहा है। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, चालू फाइनेंशियल ईयर में एक्सपोर्ट ₹12,000 करोड़ तक गिरने की संभावना है, जो पहले ₹20,000 करोड़ के स्तर पर था। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह लॉजिस्टिक्स का गहरा संकट है।
शिपिंग लागत और जियोपॉलिटिकल चुनौतियां
इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी चुनौती शिपिंग कॉस्ट में हुआ भारी इजाफा है। सामान्य समय में जो भाड़ा $1,500 से $2,000 प्रति कंटेनर हुआ करता था, वह अब बढ़कर $6,000 से $6,500 के आसपास बना हुआ है। इसके अलावा, कंटेनरों की भारी किल्लत ने सप्लाई चेन को पूरी तरह जाम कर दिया है। Red Sea में जारी तनाव के कारण एक्सपोर्टर्स को लंबे और महंगे समुद्री रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे ऑपरेटिंग कॉस्ट बेतहाशा बढ़ गई है।
प्रोडक्शन पर गहरा असर
बढ़ती वित्तीय मुश्किलों के कारण Morbi में करीब 30% से 40% मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स ने अपना कामकाज फिलहाल बंद कर दिया है। एक्सपोर्ट में गिरावट की एक वजह अमेरिका जैसे बाजारों में लगाए गए एंटी-डंपिंग ड्यूटी (Anti-dumping duties) भी हैं, जिसने मांग को काफी ठंडा कर दिया है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि जो कंपनियां एक्सपोर्ट पर ज्यादा निर्भर हैं, उनके मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है। हालांकि Varmora Granito जैसी कंपनियां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में संतुलन बनाए हुए हैं, लेकिन Kajaria Ceramics, Somany Ceramics और Asian Granito India जैसे दिग्गज भी इस सेक्टर के ट्रैंड से अछूते नहीं हैं। छोटी कंपनियों द्वारा अपना माल घरेलू बाजार में डंप करने से स्थानीय कीमतों पर भी दबाव बन सकता है, जिससे दिग्गज कंपनियों की मार्जिन स्थिरता प्रभावित होने का डर है।
