स्टार्टअप Modal Motors ने ऐसी इलेक्ट्रिक मोटर तकनीक विकसित की है जिसमें महंगे रेयर-अर्थ मैग्नेट की जरूरत नहीं पड़ेगी। विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करने के इस कदम पर निवेशकों की नजरें टिकी हैं।
टेक्नोलॉजी में बड़ा बदलाव
ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के दिग्गज Michael Van Steenburg के नेतृत्व में, स्टार्टअप Modal Motors एक नई तकनीक पर काम कर रहा है। आमतौर पर इलेक्ट्रिक मोटरों में Neodymium जैसे रेयर-अर्थ खनिजों का इस्तेमाल होता है, जिनकी सप्लाई पर कुछ चुनिंदा देशों का कब्जा है। अब यह स्टार्टअप बिना इन खनिजों के हाई-परफॉर्मेंस मोटर बनाने की चुनौती को पूरा करने में जुटा है।
क्यों है यह जरूरी?
आज के समय में ईवी (EV) और रोबोटिक्स सेक्टर इन दुर्लभ खनिजों के लिए आयात पर निर्भर है, जिससे सप्लाई चेन में अक्सर रुकावटें आती हैं। Modal Motors की रणनीति ऐसी हार्डवेयर डिजाइन तैयार करने की है जो मैन्युफैक्चरर्स को विदेशी बाजारों के भरोसे रहने से बचा सके।
कंपनी की राह पर नजरें
फिलहाल कंपनी दो मुख्य प्रोडक्ट लाइन्स पर फोकस कर रही है:
- कंपैक्ट मोटर: ड्रोन और इंडस्ट्रियल एक्चुएटर मार्केट के लिए।
- Hybrid Enigma Drive: एक फ्लैट और लो-प्रोफाइल मोटर, जो कंज्यूमर और इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स में फिट हो सके।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिना रेयर-अर्थ मैग्नेट के ये मोटर्स पारंपरिक मोटरों जैसी एफिशिएंसी और टॉर्क दे पाएंगी? इंजीनियरिंग के इस कठिन मोर्चे पर स्टार्टअप की कामयाबी ही भविष्य में इंडस्ट्रियल प्लेयर्स का रुख तय करेगी। जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर मिनरल राइट्स को लेकर तनाव बढ़ रहा है, ऐसी 'डी-रिस्किंग' तकनीक कंपनियों और निवेशकों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।
