Millworks Technologies IPO: ₹160 करोड़ जुटाएगी कंपनी, 14 जुलाई से खुल रहा सब्सक्रिप्शन

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AuthorMehul Desai|Published at:
Millworks Technologies IPO: ₹160 करोड़ जुटाएगी कंपनी, 14 जुलाई से खुल रहा सब्सक्रिप्शन

Millworks Technologies 14 जुलाई को अपना ₹160.34 करोड़ का SME IPO लॉन्च करने जा रही है। कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड ₹315-331 प्रति शेयर तय किया है। यह कंपनी एयरोस्पेस और रेल के लिए प्रिसिजन कंपोनेंट्स सप्लाई करती है, जिसने FY26 में ₹37.1 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। हालांकि, ग्रे मार्केट में अच्छी डिमांड दिख रही है, लेकिन SME स्टॉक्स में अक्सर ज्यादा वोलेटिलिटी और कम लिक्विडिटी का रिस्क होता है।

IPO की पूरी जानकारी

Millworks Technologies 14 जुलाई, 2026 को रिटेल और इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के लिए अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लेकर आ रही है। बेंगलुरु की यह कंपनी, जो हाई-प्रिसिजन मशीन्ड कंपोनेंट्स बनाती है, इस SME (स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज) पब्लिक इश्यू के जरिए ₹160.34 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखती है। सब्सक्रिप्शन 16 जुलाई, 2026 तक खुला रहेगा।

प्राइस बैंड और ऑफर स्ट्रक्चर

कंपनी ने इक्विटी शेयर का प्राइस बैंड ₹315 से ₹331 प्रति शेयर रखा है। निवेशकों को 400 शेयरों के लॉट में बोली लगानी होगी, जिसका मतलब है कि ऊपरी प्राइस बैंड पर मिनिमम इन्वेस्टमेंट ₹132,400 होगा। इस इश्यू से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से कैपिटल स्पेंडिंग और ऑपरेशनल जरूरतों के लिए किया जाएगा। इसमें ₹61.03 करोड़ नई प्लांट और मशीनरी खरीदने के लिए, जबकि ₹81.5 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए रखे जाएंगे। बाकी रकम जनरल कॉर्पोरेट पर्पज के लिए होगी।

फाइनेंशियल परफॉरमेंस

Millworks Technologies एयरोस्पेस, रेल ट्रांसपोर्ट और इंस्ट्रूमेंटेशन जैसे खास इंजीनियरिंग सेक्टर में काम करती है। मार्च 2026 में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर के नतीजों के मुताबिक, कंपनी ने जबरदस्त ग्रोथ दिखाई है। FY26 में नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹37.1 करोड़ हो गया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹5.2 करोड़ की तुलना में काफी ज्यादा है। रेवेन्यू भी बढ़कर ₹148.8 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह ₹22.1 करोड़ था। कंपनी का ज्यादातर रेवेन्यू (73%) डोमेस्टिक ऑपरेशन्स से आता है, जबकि 27% एक्सपोर्ट से।

SME IPO के जोखिम

इस इश्यू में निवेशकों की दिलचस्पी काफी ज्यादा है, लेकिन SME IPOs की कुछ खास बातों को समझना जरूरी है। मेनबोर्ड कंपनियों के मुकाबले, SME स्टॉक्स में अक्सर ट्रेडिंग वॉल्यूम कम होता है, जिससे प्राइस में ज्यादा उतार-चढ़ाव (वोलेटिलिटी) आ सकता है और बड़ी मात्रा में शेयर खरीदने या बेचने में दिक्कत हो सकती है। ग्रे मार्केट प्रीमियम, जो लिस्टिंग वाले दिन के मुनाफे का अनुमान देते हैं, वे अनऑफिशियल होते हैं और भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं देते। निवेशकों को रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) को ध्यान से पढ़ना चाहिए, खासकर क्लाइंट बेस की कंसंट्रेशन और एयरोस्पेस-रेल सेक्टर से जुड़े कैपिटल इंटेंसिव जोखिमों को समझना चाहिए। लिस्टिंग के बाद लिक्विडिटी और कंपनी की क्षमता पर नजर रखना अहम होगा।

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