Millworks Technologies 14 जुलाई को अपना ₹160.34 करोड़ का SME IPO लॉन्च कर रही है, जिसका प्राइस बैंड ₹315-331 प्रति शेयर है। कंपनी एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर को प्रिसिजन कंपोनेंट्स सप्लाई करती है और अनऑफिशियल ग्रे मार्केट में इसे जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है।
Millworks Technologies का IPO: क्या है खास?
प्रिसिजन इंजीनियरिंग फर्म Millworks Technologies, 21 जुलाई 2026 को कैपिटल मार्केट में अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के साथ दस्तक देने के लिए तैयार है। कंपनी इस इश्यू के जरिए ₹160.34 करोड़ जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह आईपीओ 14 जुलाई को खुलेगा और 16 जुलाई तक सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध रहेगा।
निवेशक ₹315 से ₹331 प्रति शेयर के प्राइस बैंड पर बोली लगा सकते हैं। इस इश्यू में लॉट साइज 400 शेयरों का है, जिसका मतलब है कि अपर प्राइस बैंड पर एक एप्लीकेंट को कम से कम ₹1,32,400 का निवेश करना होगा।
कंपनी का बिजनेस मॉडल और सेक्टर एक्सपोजर
Millworks Technologies हाई-एक्यूरेसी मशीन कंपोनेंट्स, शीट मेटल पार्ट्स और सब-असेंबली का निर्माण करती है। कंपनी बिल्ड-टू-प्रिंट और बिल्ड-टू-स्पेक, दोनों तरह की सेवाएं प्रदान करती है। इन कंपोनेंट्स की सप्लाई एयरोस्पेस, डिफेंस, रेलवे और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग जैसे संवेदनशील और रेगुलेटेड सेक्टर्स में की जाती है। इन इंडस्ट्रीज में सप्लायर होने के कारण कंपनी को कड़े क्वालिटी स्टैंडर्ड्स और लंबी अप्रूवल प्रोसेस का पालन करना पड़ता है, जो इसके लॉन्ग-टर्म स्टेबिलिटी के लिए महत्वपूर्ण हैं।
ग्रे मार्केट में कैसा है सेंटीमेंट?
आईपीओ खुलने से पहले, अनऑफिशियल ग्रे मार्केट में Millworks Technologies के शेयर लगभग 85% के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। यह निवेशकों की भारी रुचि को दर्शाता है, लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम अनऑफिशियल और सट्टा आधारित होते हैं और लिस्टिंग पर अच्छे प्रदर्शन की गारंटी नहीं देते। खासतौर पर SME IPOs में मेनबोर्ड लिस्टिंग की तुलना में ज्यादा वोलेटिलिटी (Volatility) और कम लिक्विडिटी (Liquidity) देखने को मिलती है।
आगे क्या?
सब्सक्रिप्शन बंद होने के बाद, कंपनी शेयर अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी करेगी। शेयरों की लिस्टिंग BSE SME प्लेटफॉर्म पर 21 जुलाई 2026 को होने की उम्मीद है। वास्तविक लिस्टिंग डे का प्राइस ग्रे मार्केट के अनऑफिशियल प्रीमियम के बजाय डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करेगा।
