Midwest Energy ने बेंगलुरु में अपना नया 1.2 GWh का बैटरी निर्माण प्लांट शुरू कर दिया है। कंपनी ने इस प्लांट में ₹100 करोड़ का निवेश किया है और पूरी क्षमता पर चलने पर इससे सालाना ₹1,000 करोड़ का रेवेन्यू उत्पन्न होने की उम्मीद है।
बेंगलुरु में उत्पादन शुरू, कमाई का बड़ा लक्ष्य
Midwest Energy ने आधिकारिक तौर पर बेंगलुरु में अपने नए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्लांट में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है। कंपनी ने इस 1.2 GWh क्षमता वाले प्लांट में करीब ₹100 करोड़ का निवेश किया है। यह प्लांट इंडस्ट्रियल और यूटिलिटी-स्केल प्रोजेक्ट्स के लिए बैटरी मॉड्यूल, रैक और कंटेनराइज्ड स्टोरेज सिस्टम का निर्माण करेगा। कंपनी को उम्मीद है कि यह प्लांट पूरी क्षमता से काम करने पर सालाना लगभग ₹1,000 करोड़ का रेवेन्यू देगा।
उत्पादन क्षमता बढ़ाने और R&D का विस्तार
कंपनी सिर्फ यहीं नहीं रुकने वाली। शुरुआती 1.2 GWh क्षमता से आगे बढ़कर, ऑटोमेशन अपग्रेड के ज़रिए मौजूदा प्लांट की क्षमता 2 GWh तक बढ़ाई जा सकती है। अगले तीन सालों में कुल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 6 GWh तक ले जाने का लक्ष्य है। इन महत्वाकांक्षी योजनाओं को गति देने के लिए, Midwest Energy अपने मुख्य रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) ऑपरेशन्स को हैदराबाद से बेंगलुरु शिफ्ट कर रहा है। यहाँ 30,000 वर्ग फुट का नया सेंटर बनाया गया है। कंपनी अगले एक साल में यहाँ अपने कर्मचारियों की संख्या को तीन गुना करके 150 करने की योजना बना रही है।
रेअर अर्थ मैग्नेट में भी कदम
Midwest Energy क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी के लिए महत्वपूर्ण रेअर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के उत्पादन में भी उतर रही है। इस उद्देश्य के लिए 500-टन का एक प्लांट सितंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है, जिसे बाद में 5,000 टन तक बढ़ाया जाएगा। कंपनी इस प्रोजेक्ट के लिए सरकारी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत आवेदन करने का इरादा रखती है, जिसकी अंतिम तिथि 29 जुलाई, 2026 है। यह कदम आयातित मटेरियल पर निर्भरता कम करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
सप्लाई चेन और बाजार का परिदृश्य
फिलहाल, कंपनी बैटरी के लगभग 40% कंपोनेंट्स भारत से सोर्स करती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए आवश्यक पार्ट्स के लिए अभी भी चीन से आयात पर निर्भर है। Midwest Energy का लक्ष्य अगले साल तक इन कंपोनेंट्स को स्थानीय स्तर पर तैयार करना है। इसके अलावा, कंपनी अपने "माइन-टू-मैग्नेट" बिजनेस मॉडल को सपोर्ट करने के लिए खुद की माइनिंग क्षमताएं भी विकसित कर रही है। निवेशकों को कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग को सफलतापूर्वक बढ़ाने, अनुमानित रेवेन्यू लक्ष्यों को पूरा करने और सरकारी इंसेंटिव्स हासिल करने की क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए। डोमेस्टिक कंपोनेंट लोकलाइजेशन और रेअर अर्थ मैग्नेट प्लांट की शुरुआत कंपनी के भविष्य के वित्तीय स्वास्थ्य और ऑपरेशनल स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण संकेत होंगे।
