सूरत टेक्सटाइल पर युद्ध का साया: लागत **35%** बढ़ी, प्रोडक्शन हुआ आधा!

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AuthorAditya Rao|Published at:
सूरत टेक्सटाइल पर युद्ध का साया: लागत **35%** बढ़ी, प्रोडक्शन हुआ आधा!
Overview

मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का सीधा असर गुजरात के सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर पड़ा है। कच्चे माल, खासकर मैन-मेड फाइबर्स की कीमतें **35%** तक उछल गई हैं, जिससे निर्माताओं को प्रोडक्शन के घंटे और दिन घटाने पड़ रहे हैं। रोज़ाना **₹100 करोड़** का भारी नुकसान हो रहा है और प्रोडक्शन लगभग आधा हो गया है।

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लागत में आई आसमान छूती बढ़ोतरी

सूरत, जो गुजरात का एक प्रमुख टेक्सटाइल प्रोसेसिंग हब है, पर मिडिल ईस्ट के मौजूदा संकट का गंभीर प्रभाव देखने को मिल रहा है। कोयले और आयातित मैन-मेड फाइबर्स जैसे ज़रूरी कच्चे माल की कीमतें 30-35% तक बढ़ गई हैं। इस भारी बढ़ोतरी ने फैक्ट्रियों पर दबाव बढ़ा दिया है और उन्हें मुश्किल परिचालन संबंधी फैसले लेने पर मजबूर कर दिया है।

प्रोडक्शन में बड़ी कटौती

बढ़ती लागत के चलते, सूरत की कई टेक्सटाइल प्रोसेसिंग यूनिट्स ने अपने काम के घंटे कम कर दिए हैं। जो फैक्ट्रियां पहले 24 घंटे चलती थीं, अब सिर्फ 12 घंटे चल रही हैं। कुछ यूनिट्स ने हफ़्ते में 7 दिन काम करने की बजाय 5 दिन कर दिया है। इन कदमों का मकसद नुकसान को कम करना है, लेकिन इसका असर कुल प्रोडक्शन पर पड़ा है।

भारी नुकसान और श्रमिकों की कमी

इंडस्ट्री के लीडर्स का अनुमान है कि इस सेक्टर को रोज़ाना ₹90 करोड़ से ₹100 करोड़ तक का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। फैब्रिक का प्रोडक्शन करीब आधा हो गया है, जो पहले रोज़ 7 करोड़ मीटर था, अब घटकर लगभग 3.5 करोड़ मीटर रह गया है। इस संकट को और गहरा कर रही है मजदूरों की भारी कमी, जो 35% तक बताई जा रही है। हाल ही में 2,000 से ज़्यादा प्रवासी मजदूर शहर छोड़कर चले गए हैं। यह लेबर क्रंच पहले से ही कुकिंग गैस सिलेंडर की उपलब्धता जैसी समस्याओं से जूझ रही इंडस्ट्री के लिए एक और बड़ा झटका है।

रिकवरी की राह मुश्किल

आने वाला वेडिंग सीजन डिमांड को थोड़ा बढ़ा सकता है, लेकिन इंडस्ट्री के पुराने खिलाड़ी आगाह कर रहे हैं कि रिकवरी धीमी रहेगी। अगर तनाव कम होता है और कीमतें स्थिर होती हैं, तब भी इंडस्ट्री को पुराने स्तर पर लौटने में दो से तीन महीने लग सकते हैं। गुजरात के डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने इंडस्ट्री लीडर्स से मुलाकात की है और ज़रूरी कदम उठाने का भरोसा दिलाया है, जिसमें मजदूरों के लिए एलपीजी सिलेंडर की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करना भी शामिल है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.