मेरठ, जो कभी सिर्फ क्रिकेट बैट के लिए मशहूर था, अब एक बड़ा स्पोर्ट्स इक्विपमेंट हब बनकर उभर रहा है। सरकारी मदद और घरेलू मांग बढ़ने से यहां सालाना **₹15,000 करोड़** से **₹20,000 करोड़** तक का बिज़नेस हो रहा है। फैक्ट्री का विस्तार और रोजगार बढ़ रहा है, लेकिन निर्माता अब भी बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग कर रहे हैं।
मेरठ का बदला 'खेल' का मैदान
मेरठ अब सिर्फ क्रिकेट बैट बनाने वाले शहर की पहचान से आगे बढ़ चुका है। यह शहर अब एथलेटिक्स, बैडमिंटन, फुटबॉल, जिम्नास्टिक और टेबल टेनिस जैसे कई खेलों के लिए ज़रूरी सामान बनाने का एक बड़ा केंद्र बन गया है। इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, इस हब का सालाना टर्नओवर ₹15,000 करोड़ से ₹20,000 करोड़ तक पहुंच गया है, जो हजारों मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के ज़रिए संभव हुआ है।
सरकारी योजनाओं का कितना असर?
इस इंडस्ट्री की ग्रोथ में उत्तर प्रदेश सरकार की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) स्कीम और 'खेलो इंडिया' जैसी राष्ट्रीय योजनाओं का बड़ा हाथ है। निर्माताओं को 50% तक की मशीनरी सब्सिडी और ब्याज-मुक्त लोन जैसी फाइनेंशियल मदद मिल रही है। इन सरकारी नीतियों ने छोटी और मध्यम कंपनियों को नई टेक्नोलॉजी अपनाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिससे घरेलू मांग को पूरा करने में मदद मिली है।
सिर्फ लकड़ी नहीं, अब फाइबर और प्लास्टिक का भी ज़ोर
मेरठ के इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव आया है। जहां लकड़ी के बैट अभी भी मुख्य प्रोडक्ट हैं, वहीं बढ़ती लकड़ी की कीमतों और टिकाऊपन की मांग ने निर्माताओं को प्लास्टिक और फाइबर वाले स्पोर्ट्स गुड्स बनाने पर मजबूर किया है। Buchi Sports जैसी कंपनियां हर दिन 8,000 से 10,000 प्लास्टिक क्रिकेट बैट बना रही हैं। यह बदलाव कंपनियों को रॉ मटेरियल की कीमतों और पर्यावरण के दबाव से निपटने में भी मदद कर रहा है।
रोजगार में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
इस इंडस्ट्री की ग्रोथ से स्थानीय रोजगार बाजार में भी बड़ा बदलाव आया है। खासकर, गांव-गांव में स्किल डेवलपमेंट सेंटर खुलने से महिला श्रमिकों की भागीदारी 1% से बढ़कर करीब 9-10% हो गई है। इससे कंपनियों को लेबर की कमी पूरी करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है।
आगे का रास्ता: इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत
तेजी से हो रही ग्रोथ के बावजूद, इंडस्ट्री को अब बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत महसूस हो रही है। निर्माता राज्य सरकार से एक डेडिकेटेड स्पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रियल पार्क की मांग कर रहे हैं। भविष्य में सरकारी ज़मीन आवंटन और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर नज़र रखनी होगी। कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच मुनाफा बनाए रखना इस इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
