रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Mazagon Dock Shipbuilders ने साल 2027 तक अपना ऑर्डर बुक बढ़ाकर **₹1 लाख करोड़** करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में **12%** रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, लेकिन शेयर अपने 52-वीक हाई से **28%** नीचे ट्रेड कर रहा है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट्स पर दांव
Mazagon Dock अपनी मौजूदा ₹18,218 करोड़ की ऑर्डर बुक को कई गुना बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी का पूरा ध्यान अब बड़े डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स पर है। इसमें सबसे अहम P75I सबमरीन प्रोग्राम है, जिसके लिए जर्मनी की ThyssenKrupp Marine Systems के साथ बातचीत अंतिम दौर में है। इसके अलावा, कंपनी ₹70,000 करोड़ के P17B फ्रिगेट प्रोग्राम और Swan Defence के साथ ₹40,000 करोड़ के Landing Platform Dock प्रोजेक्ट पर भी नजर गड़ाए हुए है। वहीं, ₹48,000 करोड़ के P15C डिस्ट्रॉयर प्रोग्राम की मंजूरी का भी बेसब्री से इंतजार है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च
अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए कंपनी दीघी (Dighi) और दुगाराजपट्टनम (Dugarajapatnam) में नए शिपयार्ड बनाने जा रही है। इन दोनों साइट्स पर ₹15,000 करोड़ प्रति साइट के हिसाब से निवेश की योजना है, जिससे सालाना 1.2 मिलियन ग्रॉस टनेज क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। यह विस्तार कंपनी को न केवल नेवल कॉन्ट्रैक्ट्स बल्कि कमर्शियल शिपबिल्डिंग में भी मजबूती देगा, हालांकि इतने बड़े निवेश का असर कंपनी के कैश फ्लो पर क्या पड़ेगा, इस पर बाजार की नजरें टिकी हैं।
फाइनेंशियल स्थिति और बाजार का रुख
फाइनेंशियल फ्रंट पर देखें तो कंपनी ने Q1 में 12% की रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई है और ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 15.2% रहा है। इन बेहतर नतीजों के बावजूद स्टॉक में गिरावट की वजह निवेशकों का 'एग्जीक्यूशन रिस्क' को लेकर डर है। फिलहाल स्टॉक अपने 52-वीक हाई से 28% नीचे है और वित्त वर्ष 2028 की अनुमानित कमाई के मुकाबले 25 गुना पर ट्रेड कर रहा है। आने वाले समय में सबमरीन और फ्रिगेट कॉन्ट्रैक्ट्स का साइन होना कंपनी के भविष्य की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण साबित होगा।
