युद्धपोत बनाने वाली कंपनी Mazagon Dock Shipbuilders ने आंध्र प्रदेश के दुगाराजपट्टनम में **₹15,000 करोड़** के निवेश से नया शिपयार्ड बनाने का बड़ा ऐलान किया है। कंपनी अब डिफेंस के साथ-साथ कमर्शियल जहाजों के निर्माण में भी हाथ आजमाएगी।
डिफेंस से हटकर कमर्शियल सेक्टर पर नजर
अब तक केवल भारतीय नौसेना के लिए युद्धपोत और सबमरीन बनाने के लिए पहचानी जाने वाली कंपनी Mazagon Dock ने अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने आंध्र प्रदेश में 3,488 एकड़ की विशाल जमीन पर अपना नया शिपयार्ड विकसित करने का समझौता किया है। इस प्रोजेक्ट पर अगले 5 से 7 वर्षों में ₹15,000 करोड़ का भारी निवेश किया जाएगा, जिसकी सालाना प्रोडक्शन क्षमता 1.2 मिलियन ग्रॉस टन रहने का अनुमान है।
इस प्रोजेक्ट में क्या बनेगा?
इस नए प्लांट का फोकस पूरी तरह से कमर्शियल जहाजों पर होगा। कंपनी अब बल्क कैरियर, कंटेनर जहाज और LNG कैरियर जैसे बड़े शिप बनाएगी। सरकार की 'मेक इन इंडिया' और घरेलू शिपबिल्डिंग क्षमता को बढ़ाने की रणनीति के तहत यह कदम काफी अहम माना जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या हैं चुनौतियां?
इतने बड़े पैमाने पर कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) कंपनी के कैश फ्लो और कर्ज पर असर डाल सकता है, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर रहनी चाहिए। कमर्शियल शिपबिल्डिंग का बाजार डिफेंस के मुकाबले ज्यादा कॉम्पिटिटिव और साइक्लिकल है। मार्केट के जानकारों का मानना है कि इस फील्ड में Cochin Shipyard जैसी कंपनियों के साथ Mazagon Dock की सीधी टक्कर होगी।
अब निवेशकों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि कंपनी प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और फंडिंग को कैसे मैनेज करती है। इसके अलावा, रेगुलेटरी मंजूरियों का मिलना भी इस प्रोजेक्ट की सफलता के लिए अगला बड़ा पड़ाव होगा।
