लॉजिस्टिक्स की धीमी रफ्तार बिछा रही महंगा जाल
भारत के रिटेल सेक्टर के लिए एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। ClickPost की रिपोर्ट के मुताबिक, देश का ऑर्गेनाइज्ड रिटेल सेक्टर हर साल अपनी पुरानी इंटरनल लॉजिस्टिक्स (आंतरिक आपूर्ति श्रृंखला) के कारण ₹2,000 करोड़ से भी ज्यादा का नुकसान उठा रहा है। यह नुकसान मुख्य रूप से स्टोर्स और वेयरहाउस के बीच इन्वेंट्री (माल) की धीमी आवाजाही की वजह से हो रहा है।
इस देरी के चलते कंपनियों का पैसा उन बिके न हुए माल में फंस जाता है, जिससे बिक्री पर सीधा असर पड़ता है। खासकर सेल (Sale) जैसे व्यस्त समय में यह दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। उदाहरण के लिए, एक फैशन रिटेलर ने सेल के दौरान इन्वेंट्री वापसी (Inventory Return) के समय को एक दिन से बढ़ाकर 13 दिन तक कर दिया था, जिससे एक ही सेल साइकिल में ₹2.6 करोड़ का वर्किंग कैपिटल (Working Capital) अटक गया। आजकल फैशन के ट्रेंड 15-20 दिन में बदल जाते हैं, ऐसे में यह देरी माल को पुराना बना सकती है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि रोजमर्रा की समस्याएं जैसे इनवॉइस (Invoice) की गलतियां, जो 10-15% ट्रांजेक्शन को प्रभावित करती हैं, पीक टाइम (Peak Time) में बिक्री को 8-12% तक कम कर देती हैं।
85% ब्रांड्स अब भी मैन्युअल सिस्टम पर निर्भर
भारतीय रिटेल सेक्टर का लगभग 85% हिस्सा अभी भी पुराने मैन्युअल तरीकों, जैसे ईमेल और स्प्रेडशीट, पर निर्भर है। ये तरीके ऑटोमेटेड (Automated) टूल्स की तुलना में 5 गुना तक धीमे हैं। बड़ी रिटेल चेनों के लिए, इससे इन्वेंट्री में दो हफ़्ते तक की देरी हो सकती है, जो प्रति सेल साइकिल ₹40-50 लाख का नुकसान करा सकती है।
मैन्युअल तरीकों से केवल 30-40% पिकअप पहली बार में हो पाते हैं, जबकि ऑटोमेटेड सिस्टम 90% से ज्यादा फर्स्ट-अटेम्प्ट पिकअप सुनिश्चित करते हैं। यह टेक्नोलॉजी गैप (Technology Gap) ऐसे समय में है जब लॉजिस्टिक्स ऑटोमेशन मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले सालों में अरबों डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
वित्तीय सेहत में भारी अंतर
रिटेलर्स की वित्तीय स्थिति में भी काफी अंतर देखने को मिलता है, जो उनकी टेक्नोलॉजी अपडेट करने की क्षमता को प्रभावित करता है। जहां Tata की Trent Ltd. का मार्केट कैप ₹1.26 लाख करोड़ है और वह अच्छा प्रॉफिट ग्रोथ दिखा रही है, वहीं Avenue Supermarts (DMart) का मार्केट कैप ₹2.45 लाख करोड़ है और उसकी सेल्स लगातार बढ़ रही है।
इसके विपरीत, Aditya Birla Fashion & Retail Ltd. (ABFRL) जैसी कंपनियां चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ABFRL का मार्केट कैप ₹7,000 करोड़ के आसपास है और उसका P/E रेशियो (PE Ratio) नेगेटिव -9.52 TTM है, जो नुकसान का संकेत देता है। पिछले 5 सालों में सेल्स ग्रोथ भी नेगेटिव -3.51% रही है और ROE (Return on Equity) -11% नेगेटिव है। इस वित्तीय अंतर का मतलब है कि ABFRL जैसी कंपनियों के पास जरूरी अपग्रेड के लिए फंड की कमी हो सकती है, जिससे वे मजबूत प्रतिद्वंद्वियों से पिछड़ सकती हैं।
रिटेल ऑपरेशन्स में बढ़ता गैप
लगातार ₹2,000 करोड़ से ज्यादा के वार्षिक नुकसान के बावजूद मैन्युअल सिस्टम का व्यापक उपयोग, भारतीय रिटेल सेक्टर की बदलाव के प्रति बड़ी अक्षमता को दर्शाता है। यह पिछड़ापन एक बड़ा नुकसान पहुंचा रहा है, खासकर तब जब रिटेल में AI (Artificial Intelligence) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। बड़ी रिटेल कंपनियां पहले से ही AI की मदद से अपने ऑपरेशनल खर्चों में कटौती कर रही हैं।
ABFRL जैसी घाटे में चल रही कंपनियों के लिए ऐसे महत्वपूर्ण टेक अपग्रेड (Tech Upgrade) का खर्च उठाना मुश्किल है। यह गैप उन बड़ी रिटेल कंपनियों (जिनमें 78% एडवांस्ड टेक्नोलॉजी अपना रही हैं) और छोटी कंपनियों (जिनमें केवल 30% ही अपना रही हैं) के बीच लगातार बढ़ रहा है। जो रिटेलर्स अपनी इंटरनल लॉजिस्टिक्स को ऑटोमेट (Automate) नहीं करेंगे, वे प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने, बाजार के उतार-चढ़ाव से जूझने और अंततः गायब होने का जोखिम उठाएंगे। यह ऑपरेशनल इनएफिशिएंसी (Operational Inefficiency) एक छिपे हुए टैक्स की तरह काम कर रही है, जो कमजोर खिलाड़ियों को नुकसान पहुंचा रही है और सेक्टर की समग्र ग्रोथ को धीमा कर रही है।
मॉडर्न लॉजिस्टिक्स की ओर बढ़ता कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि रिटेल में सफलता के लिए टेक्नोलॉजी को अपनाना अब अनिवार्य हो गया है। सरकार की नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी (National Logistics Policy) जैसी पहलें इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाकर इस दिशा में समर्थन कर रही हैं।
जो कंपनियां AI को अपने मुख्य क्षेत्रों में इस्तेमाल कर रही हैं, वे परफॉर्मेंस में महत्वपूर्ण सुधार देख सकती हैं। जो रिटेलर्स इंटरनल लॉजिस्टिक्स में ऑटोमेशन को नजरअंदाज कर रहे हैं, वे प्रतिस्पर्धियों से पीछे रह जाएंगे, उच्च लागतों का सामना करेंगे और ग्रोथ के मौके गंवा देंगे। स्मार्ट लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशंस (Smart Logistics Solutions), जिनमें AI और रोबोटिक्स (Robotics) शामिल हैं, तेज ऑपरेशन्स और बेहतर कॉस्ट कंट्रोल (Cost Control) के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारतीय रिटेल सेक्टर को बढ़ने और प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए अपनी इंटरनल लॉजिस्टिक्स को मॉडर्नाइज (Modernize) करना बेहद जरूरी है।