महाराष्ट्र सरकार ने नई मैरीटाइम पॉलिसी का ऐलान किया है, जिसमें Mazagon Dock Shipbuilders के साथ मिलकर दीघी में ₹26,500 करोड़ का बड़ा शिपयार्ड प्रोजेक्ट शामिल है। इस खबर के बीच निवेशक कंपनी के हालिया कमजोर नतीजों पर भी नजर बनाए हुए हैं, जिसमें कंपनी का मुनाफा **54%** गिरा है।
महाराष्ट्र सरकार ने अपनी तटवर्ती औद्योगिक क्षमता को बढ़ाने के लिए एक नई मैरीटाइम डेवलपमेंट पॉलिसी को मंजूरी दी है। इस योजना का मुख्य केंद्र Mazagon Dock Shipbuilders (MDL) के साथ मिलकर दीघी में तैयार होने वाला ₹26,500 करोड़ का शिपयार्ड प्रोजेक्ट है। सरकार का दावा है कि 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस' और आसान पर्यावरणीय मंजूरी मिलने से प्रोजेक्ट में देरी कम होगी और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ेगा।
खराब नतीजों का असर
इस बड़े प्रोजेक्ट के ऐलान के बावजूद, निवेशकों के लिए चिंता का विषय कंपनी की हालिया परफॉर्मेंस है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 54% गिरकर ₹344 करोड़ पर आ गया है। कंपनी का रेवेन्यू भी 16.5% घटकर ₹2,446 करोड़ रहा, जबकि EBITDA मार्जिन जो पिछले साल 23.7% था, वह अब गिरकर 8.1% पर आ गया है। नतीजों के बाद शेयर में 10% तक की गिरावट देखी गई थी।
वित्तीय चुनौतियां और विस्तार
Mazagon Dock फिलहाल दीघी और दुगराजपट्टनम शिपयार्ड क्लस्टर्स के लिए फंडिंग मॉडल तैयार कर रही है। कंपनी ने अपनी सब्सिडियरी Colombo Dockyard PLC के कामकाज के लिए State Bank of India से ₹1,250 करोड़ की अतिरिक्त क्रेडिट फैसिलिटी भी मंजूर की है। हालांकि कंपनी अपनी क्षमता बढ़ा रही है, लेकिन मार्जिन पर दबाव और ऑर्डर एग्जीक्यूशन में सुस्ती भविष्य के लिए बड़े 'की-मॉनिटरेबल्स' बने रहेंगे।
