MV Electrosystems Share: IPO के बाद **52%** का तूफानी उछाल, मधुसूदन के फंड को मिला बंपर रिटर्न!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
MV Electrosystems Share: IPO के बाद **52%** का तूफानी उछाल, मधुसूदन के फंड को मिला बंपर रिटर्न!

MV Electrosystems के शेयरों ने IPO के बाद से निवेशकों को मालामाल कर दिया है। कंपनी के शेयर **52%** बढ़कर **₹644.80** पर पहुंच गए हैं, जबकि IPO प्राइस सिर्फ **₹425** था। खास बात ये है कि दिग्गज निवेशक मधुसूदन के फंड ने महज तीन दिनों में ही **51.7%** का तगड़ा मुनाफा कमाया है।

IPO के बाद शेयरों में जबरदस्त तेजी

MV Electrosystems के शेयरों में सोमवार को भी तेजी जारी रही और यह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 5.4% बढ़कर ₹644.80 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। 6 अगस्त 2026 को शेयर बाजार में डेब्यू करने के बाद से, स्टॉक अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) प्राइस ₹425 प्रति शेयर से लगभग 52% ऊपर चढ़ चुका है।

एंकर निवेशकों के लिए बड़ी कमाई

लिस्टिंग के बाद बाजार के इस उत्साह का फायदा एंकर निवेशकों को भी मिला है। इनमें फाउंडर्स कलेक्टिव फंड भी शामिल है, जिसका संबंध मशहूर निवेशक मधुसूदन के 'केला फंड' से है। इस फंड को IPO प्राइस ₹425 पर 1.64 लाख शेयर आवंटित किए गए थे, जो कुल ₹7 करोड़ का निवेश था। शेयर के ₹644.80 तक पहुंचने पर, इस होल्डिंग का मूल्य बढ़कर लगभग ₹10.58 करोड़ हो गया है। यह कंपनी के डेब्यू के बाद केवल तीन ट्रेडिंग सत्रों में लगभग 51.7% का लाभ है।

कंपनी का बिजनेस और फाइनेंशियल हाल

MV Electrosystems रेलवे रोलिंग स्टॉक सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रिकल और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण बनाने वाली कंपनी है। कंपनी ने अपने IPO के जरिए ₹290 करोड़ जुटाए थे, जिसका प्राइस ₹400 से ₹425 के बीच तय किया गया था। हालांकि, शुरुआती बाजार प्रतिक्रिया मजबूत रही है, कंपनी की वित्तीय पृष्ठभूमि पर सावधानीपूर्वक ध्यान देने की आवश्यकता है।

फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, कंपनी ने ₹12.63 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है। इसके अलावा, कंपनी 31.4% के नेगेटिव रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) से जूझ रही है, जो निवेश की गई पूंजी पर लाभ उत्पन्न करने में कंपनी की चुनौतियों को दर्शाता है।

वर्किंग कैपिटल और ऑपरेशनल रिस्क

निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण बात कंपनी के वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट पर नजर रखना है। वर्किंग कैपिटल को कैश में बदलने में लगने वाला समय काफी बढ़ गया है, जो 89.9 दिनों से बढ़कर 230 दिन हो गया है। यह रुझान बताता है कि कंपनी लिक्विडिटी के दबाव का सामना कर सकती है, क्योंकि उसे अपने उत्पादों और सेवाओं के लिए भुगतान प्राप्त करने में अधिक समय लग रहा है।

इसके अतिरिक्त, कंपनी अपने राजस्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारतीय रेलवे से प्राप्त करती है। सरकारी रेलवे खर्चों में कोई भी बदलाव या प्रोजेक्ट अवार्ड में देरी सीधे इसके बिजनेस पर असर डाल सकती है। इन वित्तीय और ऑपरेशनल बाधाओं को देखते हुए, भविष्य के तिमाही नतीजों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि ये दिखाएंगे कि कंपनी आने वाली तिमाहियों में अपनी लाभप्रदता में सुधार कर सकती है और अपने कैश फ्लो को अधिक कुशलता से प्रबंधित कर सकती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.