रिकॉर्ड रेवेन्यू और मुनाफे में जबरदस्त उछाल
MRF Ltd. ने फाइनेंशियल ईयर 2026 का समापन शानदार वित्तीय नतीजों के साथ किया है। टायर बनाने वाली इस कंपनी ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही (Q4 FY26) के लिए ₹702.25 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹510.50 करोड़ की तुलना में 37.6% की बढ़ोतरी है। वहीं, ऑपरेशन्स से रेवेन्यू 13.7% बढ़कर ₹8,044.22 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹7,074.82 करोड़ था। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, MRF ने ₹30,000 करोड़ का आंकड़ा पार करते हुए ₹31,149.01 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया। यह FY25 की तुलना में 10.6% की बढ़ोतरी है। पूरे साल का नेट प्रॉफिट भी 29.5% बढ़कर ₹2,426.10 करोड़ पर पहुंच गया, जो FY25 में ₹1,873.29 करोड़ था।
कंपनी इस शानदार परफॉर्मेंस का श्रेय नए प्रोडक्ट्स, खासकर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट और ओरिजिनल इक्विपमेंट (OE) सप्लायर के तौर पर अपनी मजबूत स्थिति को दे रही है। मजबूत रीप्लेसमेंट और OE सेल्स के साथ-साथ नए मॉडल्स की डिमांड ने भी चौथे क्वार्टर में कंपनी को खूब फायदा पहुंचाया। MRF भविष्य की डिमांड को पूरा करने के लिए अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तार भी कर रही है।
बढ़ती लागत बन रही चिंता का सबब
जहां एक ओर रेवेन्यू और प्रॉफिट के आंकड़े प्रभावशाली हैं, वहीं MRF एक चुनौतीपूर्ण कारोबारी माहौल का सामना कर रही है। कच्चे माल की लागत बढ़ रही है और सप्लाई चेन में भी रुकावटें बनी हुई हैं। कंपनी का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण इनपुट मैटेरियल्स की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जो भविष्य में भी जारी रह सकती है और खर्चों को काफी बढ़ा सकती है। कच्चा तेल डेरिवेटिव्स और नेचुरल रबर जैसी सामग्रियों की बढ़ती लागत टायर इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चिंता है।
इन बढ़ी हुई लागतों से निपटने के लिए MRF ने पहले ही कीमतों में बढ़ोतरी की है और लागत-बचत के उपाय लागू किए हैं। कंपनी आगे भी कीमतों में और इजाफा करने की योजना बना रही है। हालांकि Q4 FY26 में EBITDA मार्जिन 1% बढ़कर 16% हो गया, यह मुख्य रूप से ऊंचे बिक्री वॉल्यूम और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के कारण हुआ। इससे पता चलता है कि लागत का दबाव मौजूद है, जिसे फिलहाल इन फैक्टर्स से ऑफसेट किया जा रहा है।
कॉम्पिटिटिव टायर मार्केट में MRF
MRF, Apollo Tyres, CEAT, और JK Tyre जैसी कंपनियों के साथ एक व्यस्त टायर मार्केट में प्रतिस्पर्धा करती है। MRF अपनी लीडिंग मार्केट पोजीशन और बड़े पैमाने को बनाए हुए है। हालांकि, इसकी वैल्यूएशन अक्सर प्रीमियम पर रहती है। मई 2026 की शुरुआत में, MRF का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 24.55x से 27x के बीच था। यह Apollo Tyres (लगभग 28.32x) और Balkrishna Industries (लगभग 32.83x) के समान या थोड़ा अधिक है, लेकिन JK Tyre (लगभग 18.1x) से ज्यादा है।
FY26 के लिए ₹235 प्रति शेयर के प्रस्तावित डिविडेंड (Dividend) के बावजूद, MRF के शेयर में कुछ कमजोरी देखी गई है। यह मई 2026 की शुरुआत में अपने 52-हफ्ते के हाई से लगभग 14% से 20% नीचे कारोबार कर रहा था। यह दर्शाता है कि बाजार कंपनी के मजबूत ऑपरेशनल परफॉरमेंस के बावजूद भविष्य की अनिश्चितताओं और लागत दबावों को ध्यान में रख रहा है।
आगे की राह और एनालिस्ट्स की राय
MRF का मैनेजमेंट भविष्य को लेकर सतर्क है। अनिश्चित आर्थिक परिस्थितियों और मार्जिन पर बढ़ते दबाव के कारण भविष्य की ग्रोथ का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है। कंपनी लॉन्ग-टर्म डिमांड के लिए अपनी सुविधाओं का विस्तार कर रही है, लेकिन नियर-टर्म आउटलुक कच्चे माल की बढ़ती लागत और डिमांड में नरमी की संभावना से प्रभावित है।
एनालिस्ट्स की राय MRF पर मिली-जुली है, जिसमें 'न्यूट्रल' की कंसेंसस रेटिंग है। स्टॉक को कवर करने वाले दस एनालिस्ट्स में से पांच खरीदने, चार बेचने और एक होल्ड की सलाह देते हैं। औसत 12-महीने का प्राइस टारगेट लगभग ₹1,49,866 है, जो मामूली बढ़ोतरी की संभावना दिखाता है। हालांकि, 28 अप्रैल, 2026 को MarketsMOJO द्वारा हाई वैल्यूएशन और कमजोर टेक्निकल इंडिकेटर्स का हवाला देते हुए 'सेल' रेटिंग में डाउनग्रेड किया गया था, जो कंपनी के मजबूत तिमाही नतीजों के विपरीत है।
