📉 नतीजों की गहराई से पड़ताल
MRF लिमिटेड ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में कमाल का प्रदर्शन दिखाया है। कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 15.26% की शानदार बढ़ोतरी हुई है, जो अब ₹7,933.69 करोड़ पर पहुंच गया है। लेकिन, असली जादू प्रॉफिट (Profit) में देखने को मिला। प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 121.41% की भारी उछाल आई है, जो पिछले साल के ₹306.72 करोड़ से बढ़कर ₹679.14 करोड़ हो गया है।
मार्जिन में बड़े बदलाव का कमाल
इस जबरदस्त प्रॉफिट ग्रोथ का सबसे बड़ा कारण कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margin) में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी है। Q3 FY26 में ऑपरेटिंग मार्जिन 11.70% रहा, जो कि पिछले साल की समान अवधि के 5.63% से 6.07 प्रतिशत अंक ज्यादा है। इसी तरह, नेट प्रॉफिट मार्जिन भी 4.39% से बढ़कर 8.43% हो गया। इससे पता चलता है कि MRF अपनी आमदनी को मुनाफे में बदलने में कितना सफल रहा है।
9 महीनों के आंकड़े और खास वजहें
अगर नौ महीनों (9-month period ended December 31, 2025) की बात करें, तो PAT में 26.44% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹1,674.96 करोड़ रहा। कंपनी ने एक खास आइटम (Exceptional Item) के तौर पर ₹77.20 करोड़ का उल्लेख किया है, जो नए लेबर कोड्स के चलते ग्रेच्युटी/लीव लायबिलिटी में एकमुश्त बढ़ोतरी के कारण हुआ है।
कंसॉलिडेटेड नतीजे और शेयरधारकों को तोहफा
कंसॉलिडेटेड (Consolidated) नतीजों पर नजर डालें तो Q3 FY26 में PAT 117.73% बढ़कर ₹691.83 करोड़ पर पहुंच गया। इस तिमाही के लिए अर्निंग्स पर शेयर (EPS) ₹1,631.23 दर्ज किया गया।
बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इस शानदार प्रदर्शन को देखते हुए फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए ₹3 प्रति इक्विटी शेयर का दूसरा अंतरिम डिविडेंड (Dividend) घोषित किया है।
मजबूत फाइनेंशियल हेल्थ
MRF की फाइनेंशियल पोजीशन (Financial Position) काफी मजबूत बनी हुई है। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) सिर्फ 0.03 है, जो दिखाता है कि कंपनी पर कर्ज बहुत कम है। वहीं, करंट रेश्यो (Current Ratio) सुधरकर 1.67 हो गया है, जो अच्छी लिक्विडिटी और वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट का संकेत देता है।
जोखिम और भविष्य की राह
इस तिमाही के नतीजों पर नए लेबर कोड्स के चलते एकमुश्त कर्मचारी देनदारी (Employee Liabilities) बढ़ने का असर पड़ा है। हालांकि, कंपनी का भविष्य का आउटलुक (Outlook) काफी पॉजिटिव दिख रहा है। मार्जिन में बढ़त और रेवेन्यू ग्रोथ के सहारे निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में लागत कुशलता (Cost Efficiencies) और बाजार की मांग (Market Demand) पर नजर रखनी चाहिए।