प्रीफरेंशियल इश्यू से फंड जुटाने की तैयारी
Lokesh Machines Limited ने शेयर और वॉरंट्स (Warrants) के प्रीफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) के जरिए ₹74.10 करोड़ जुटाने का प्रस्ताव रखा है। इस इश्यू के तहत, कंपनी ₹181.71 प्रति सिक्योरिटी की दर से इक्विटी शेयर (Equity Shares) और वॉरंट जारी करेगी। कंपनी ने 6 मार्च, 2026 को इस प्रस्ताव की घोषणा की थी, और अब शेयरधारकों की मंजूरी के लिए 3 अप्रैल, 2026 को एक EGM बुलाई गई है।
प्रस्तावित फंड जुटाने की योजना के तहत, कंपनी इक्विटी शेयरों से लगभग ₹23.62 करोड़ और वॉरंट्स से लगभग ₹50.48 करोड़ जुटाने की उम्मीद कर रही है। यह फंड मुख्य रूप से कंपनी के मौजूदा कर्ज को चुकाने, भविष्य के कैपिटल एक्सपेंडिचर की जरूरतों को पूरा करने और वर्किंग कैपिटल को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
क्यों अहम है यह फंड जुटाना?
हाल के समय में अमेरिकी OFAC (Office of Foreign Assets Control) प्रतिबंधों के कारण कंपनी को राजस्व में भारी गिरावट का सामना करना पड़ा है। इस स्थिति को देखते हुए, कंपनी की वित्तीय सेहत को मजबूत करना और बैलेंस शीट को दुरुस्त करना बेहद जरूरी हो गया है। यह कैपिटल रेज (Capital Raise) कंपनी को अपने कर्ज को कम करने, नई निवेश योजनाओं को आगे बढ़ाने और संचालन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
कंपनी का पिछला प्रदर्शन और चुनौतियां
हैदराबाद स्थित Lokesh Machines, जो CNC मशीनें और ऑटो कंपोनेंट्स बनाती है, कई मुश्किलों से गुजरी है। 30 अक्टूबर, 2024 को कंपनी को अमेरिकी OFAC की प्रतिबंध सूची में डाल दिया गया था, जिससे इसके संचालन पर गंभीर असर पड़ा और राजस्व में लगभग 22.28% की गिरावट आई। फाइनेंशियल ईयर 25 (FY25) के लिए राजस्व पर इसका असर देखा गया। इसके अलावा, Q2 FY26 में कंपनी के नेट प्रॉफिट में पिछले साल की तुलना में 81.74% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो घटकर केवल ₹0.63 करोड़ रह गया।
इन्हीं परेशानियों के बीच, कंपनी को BSE और NSE से बोर्ड की संरचना नियमों का पालन न करने के लिए ₹4.83 लाख का जुर्माना भी भरना पड़ा था।
नई उम्मीदें और मौके
इन चुनौतियों के बावजूद, कंपनी को रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) से मशीन पिस्टल सब-असेंबली के लिए ₹22 करोड़ का एक अहम डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी OFAC प्रतिबंध सूची से बाहर निकलने के लिए भी सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है। इससे पहले, कंपनी ने जनवरी 2024 में ₹14.6 करोड़ का फंड प्रीफरेंशियल इश्यू के जरिए जुटाया था।
निवेशकों के लिए मुख्य जोखिम
- शेयरहोल्डर की मंजूरी: यह प्रीफरेंशियल इश्यू 3 अप्रैल, 2026 को होने वाली EGM में शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर करता है।
- रेगुलेटरी क्लीयरेंस: SEBI और अन्य संबंधित प्राधिकरणों से सभी आवश्यक मंजूरी मिलना महत्वपूर्ण है।
- वॉरंट कन्वर्जन: अगर वॉरंट धारक 18 महीने के भीतर अपने अधिकार का इस्तेमाल नहीं करते हैं, तो यह कंपनी की पूंजी संरचना को प्रभावित कर सकता है।
- OFAC प्रतिबंधों का असर: OFAC प्रतिबंधों की स्थिति और कंपनी के इनसे बाहर निकलने के प्रयासों का कंपनी के राजस्व और मुनाफे पर असर जारी रहेगा।
मुख्य वित्तीय आंकड़े
- प्रस्तावित कुल फंड: ₹74.10 करोड़
- प्रति सिक्योरिटी इश्यू प्राइस: ₹181.71 (इक्विटी शेयर और वॉरंट)
- FY25 राजस्व में गिरावट: लगभग 22.28%
- Q2 FY26 नेट प्रॉफिट: ₹0.63 करोड़ (81.74% की गिरावट)
- रक्षा अनुबंध का मूल्य: ₹22 करोड़