Lohia Corp का IPO आज बंद हो गया और इसने 7.25 गुना सब्सक्रिप्शन हासिल किया है। खासकर अंतिम दिन क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) की ओर से जबरदस्त मांग देखी गई। निवेशकों ने ऑफर पर उपलब्ध 1.43 करोड़ शेयरों के मुकाबले 10 करोड़ से ज्यादा शेयरों के लिए बोली लगाई। यह वोवन रैफिया मशीनरी बनाने वाली कंपनी ₹404-₹425 प्रति शेयर के प्राइस बैंड पर लिस्ट होने वाली है।
Detailed Coverage
IPO में दिखी जबरदस्त डिमांड
Lohia Corp लिमिटेड ने सोमवार को अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) का समापन किया। बोली अवधि के अंत तक, निवेशकों ने कुल 10.40 करोड़ शेयरों के लिए बिड किया, जो कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध 1.43 करोड़ शेयरों की तुलना में काफी ज्यादा है। इस भारी मांग के कारण IPO 7.25 गुना सब्सक्राइब हुआ।
QIBs का रहा खास योगदान
क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) सेगमेंट में सबसे ज्यादा मांग देखी गई, जो 9.11 गुना सब्सक्राइब हुआ। शुरुआती दो दिनों में यह कैटेगरी धीमी रही थी, केवल 0.51 गुना सब्सक्राइब हुई थी। लेकिन अंतिम दिन फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) और म्यूचुअल फंड्स की एंट्री से इसने रफ्तार पकड़ी। अकेले विदेशी निवेशकों ने 3.91 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां डालीं।
अन्य निवेशक वर्गों में भी अच्छी भागीदारी रही। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) ने 6.82 गुना सब्सक्रिप्शन दिया, जबकि रिटेल इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स (RIIs) के लिए आरक्षित हिस्सा 2.77 गुना सब्सक्राइब हुआ। कर्मचारियों के लिए रखे गए शेयरों का हिस्सा 1.39 गुना सब्सक्राइब हुआ।
कंपनी की वित्तीय स्थिति और बाजार में पकड़
Lohia Corp वोवन रैफिया मशीनरी बनाने वाली एक प्रमुख कंपनी है और घरेलू बाजार में इसकी 40.7% हिस्सेदारी है। फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, कंपनी ने ₹1,717 करोड़ का कुल रेवेन्यू और 18.6% का EBITDA मार्जिन दर्ज किया। कंपनी का लक्ष्य IPO के बाद लगभग ₹4,490 करोड़ के मार्केट कैपिटलाइजेशन तक पहुंचना है, जो प्राइस बैंड के ऊपरी सिरे पर आधारित है।
मुनाफे के मोर्चे पर, कंपनी ने मजबूत रिटर्न रेशियो दिखाया है, जिसमें इक्विटी पर रिटर्न (RoE) 38.9% और कैपिटल एम्प्लॉयड पर रिटर्न (RoCE) 42.6% है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का वैल्यूएशन थोड़ा महंगा है, FY26 की कमाई के आधार पर P/E रेशियो 23.21 गुना रहने का अनुमान है।
मुख्य जोखिम जो निवेशकों को ध्यान में रखने चाहिए
कंपनी अपने खास बाजार में मजबूत स्थिति रखती है, लेकिन कुछ संरचनात्मक जोखिम भी हैं जिन पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए। कुछ सहायक कंपनियों में हुए नुकसान का असर कंपनी के समेकित वित्तीय प्रदर्शन पर पड़ सकता है। इसके अलावा, कंपनी को अनहेच्ड फॉरेन एक्सचेंज के उतार-चढ़ाव का भी सामना करना पड़ सकता है। चूंकि मशीनरी व्यवसाय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार या कच्चे माल का आयात शामिल हो सकता है, इसलिए मुद्रा में अस्थिरता लाभ मार्जिन को प्रभावित कर सकती है।
शेयरधारकों को अंतिम लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी बाजार हिस्सेदारी कैसे बनाए रखती है और अपने ऑर्डर बुक को कितनी प्रभावी ढंग से पूरा करती है। IPO बंद होने के बाद, निवेशक अब शेयर आवंटन प्रक्रिया और स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टिंग की तारीख पर नजर रखेंगे।
