Lloyds Metals & Energy अपने Konsari स्टील प्लांट की क्षमता को मौजूदा **4.5 MTPA** से बढ़ाकर **8 MTPA** करने की योजना पर विचार कर रही है। कंपनी का लक्ष्य अपने कैप्टिव आयरन ओर माइनिंग ऑपरेशंस का पूरा लाभ उठाना है।
बड़े विस्तार की तैयारी
महाराष्ट्र स्थित Konsari फैसिलिटी में कंपनी अब बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी में है। हालांकि अभी कंपनी के पास 4.5 MTPA स्टील प्लांट की मंजूरी है, लेकिन मैनेजमेंट अब इसे 8 MTPA तक ले जाने की तकनीकी व्यवहार्यता (feasibility) जांच रहा है। यह कदम कंपनी को एक साधारण माइनिंग प्लेयर से एक बड़े इंटीग्रेटेड स्टील प्रोड्यूसर में बदलने की रणनीति का हिस्सा है।
क्यों लिया जा रहा है यह फैसला?
कंपनी की सफलता की धुरी Surjagarh आयरन ओर माइन्स हैं। इस फाइनेंशियल ईयर में 26 मिलियन टन आयरन ओर उत्पादन की उम्मीद है। मई 2026 में कंपनी ने अपना दूसरा 4 MTPA का पेलेट प्लांट शुरू किया था, जिससे कुल क्षमता 8 MTPA हो गई है। कंपनी अब कच्चा माल बेचने के बजाय उसे फिनिश्ड स्टील में बदलकर ज्यादा वैल्यू हासिल करना चाहती है।
वित्तीय सेहत और चुनौतियां
Q1 फाइनेंशियल ईयर 2027 में कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया है। रेवेन्यू ₹7,354 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट ₹1,701 करोड़ तक पहुंच गया। कंपनी आगामी प्रोजेक्ट्स के लिए ₹85 बिलियन से ₹110 बिलियन तक का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) प्लान कर रही है।
हालांकि, इस बड़े विस्तार के साथ जोखिम भी जुड़े हैं:
- एग्जीक्यूशन रिस्क: इतने बड़े पैमाने पर शिफ्ट होना तकनीकी और वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण है।
- निर्भरता: पूरा बिजनेस मॉडल Surjagarh माइंस पर टिका है। वहां किसी भी तरह की रेग्युलेटरी या एनवायर्नमेंटल बाधा पूरे वैल्यू चेन को प्रभावित कर सकती है।
- मार्केट रिस्क: स्टील और आयरन ओर की ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव कंपनी के मार्जिन पर सीधा असर डाल सकते हैं।
निवेशकों को अब कंपनी की ओर से औपचारिक बोर्ड अप्रूवल और फंडिंग प्लान की स्पष्टता का इंतजार है।
