एनालिस्ट्स का भरोसा और सेक्टर ग्रोथ
Linde India के शेयर को लेकर एनालिस्ट्स काफी बुलिश (Bullish) हैं। उन्हें स्टॉक में 'आउटपरफॉर्म' (Outperform) रेटिंग मिली हुई है और शॉर्ट-टर्म आउटलुक (Short-term Outlook) काफी पॉजिटिव दिख रहा है। हाल के हफ्तों में शेयर में अच्छी तेजी देखी गई है, जिसने पिछले 1 साल में निवेशकों को लगभग 16-17% का रिटर्न दिया है। एनालिस्ट्स का औसत 1-साल का टारगेट प्राइस (Target Price) करीब ₹7,180 INR है, जबकि कुछ हाई फोरकास्ट (High Forecasts) इसे ₹8,600 INR तक पहुंचाने की उम्मीद कर रहे हैं। मार्च 2026 के मध्य तक, स्टॉक लगभग ₹7,150-₹7,358 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था।
इस तेजी के पीछे की एक बड़ी वजह इंडस्ट्रियल गैस मार्केट में शानदार ग्रोथ की उम्मीदें हैं। अनुमान है कि भारत का इंडस्ट्रियल गैस मार्केट 2034 तक 6.83% से 9.5% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ेगा। मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, रिन्यूएबल एनर्जी (जैसे ग्रीन हाइड्रोजन) और फार्मा सेक्टर में बढ़ती डिमांड इस ग्रोथ को बढ़ावा देगी।
वैल्यूएशन और फाइनेंशियल हेल्थ
Linde India का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) मार्च 2026 तक ₹60,000 से ₹62,000 करोड़ के बीच है। कंपनी का पी/ई रेश्यो (P/E Ratio) लगभग 100x से 134x के बीच है, जो कि इंडियन केमिकल्स इंडस्ट्री के एवरेज 21-24x और पीयर्स (Peers) के 32x के मुकाबले काफी ज्यादा है। कंपनी लगभग डेट-फ्री (Debt-Free) है और इसका रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) करीब 12.42% है।
रेगुलेटरी जांच का शिकंजा
पॉजिटिव आउटलुक के बावजूद, Linde India कई गंभीर रेगुलेटरी और गवर्नेंस चुनौतियों का सामना कर रही है। भारतीय सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड (SEBI) कंपनी के पिछले रिलेटेड-पार्टी ट्रांजैक्शंस (RPTs) की गहराई से जांच कर रहा है, खासकर Praxair India Pvt Ltd और Linde South Asia Services Pvt Ltd जैसी सहयोगी कंपनियों के साथ हुए सौदों पर।
शेयरहोल्डर्स ने एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) में 5 मार्च 2026 को हुए ऐसे कई RPT प्रपोजल को भारी बहुमत से खारिज कर दिया। इनमें से एक ₹417 करोड़ का FY26 के लिए ट्रांजैक्शन था, जिसे लगभग 89.24% वोट के खिलाफ पड़े। इसी तरह के प्रस्ताव जून 2021 में भी खारिज किए गए थे।
SEBI ने Linde India के इन सौदों का बचाव करने के तरीके की आलोचना की है और उसकी लीगल ओपिनियन (Legal Opinions) को 'बेईमान और भ्रामक' बताया है। सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने भी SEBI के रुख का समर्थन किया और कहा कि रिलेटेड-पार्टी ट्रांजैक्शंस को एक साथ ग्रुप करके उनकी अहमियत तय की जानी चाहिए, न कि सिर्फ अलग-अलग डील के वैल्यू के आधार पर।
CFO का इस्तीफा और भविष्य की चिंताएं
रेगुलेटरी दबाव के बीच, कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नीरज कुमार जुमरानी ने 15 फरवरी 2026 को इस्तीफा दे दिया। जुमरानी, जिन्होंने Linde में 16 साल से ज्यादा का समय फाइनेंस डिपार्टमेंट में बिताया था, इन ट्रांजैक्शंस को संभालने में अहम भूमिका निभा रहे थे।
यह लगातार रेगुलेटरी एक्शन और शेयरहोल्डर्स के विरोध कंपनी में गवर्नेंस से जुड़ी बड़ी समस्याओं को उजागर करता है, जो माइनॉरिटी इन्वेस्टर्स (Minority Investors) के लिए अनिश्चितता पैदा कर सकती हैं और भविष्य के बिजनेस ऑपरेशन्स और वैल्यूएशन को प्रभावित कर सकती हैं। Linde India की पेरेंट कंपनी, Linde plc, को भी SEBI की जांच का सामना करना पड़ा है।
आगे क्या?
भविष्य को देखते हुए, एनालिस्ट्स Linde India के बारे में अभी भी उम्मीदें लगा रहे हैं, खासकर इंडस्ट्रियल गैस सेक्टर में ग्रोथ की वजह से। हालांकि, निवेशक इन रेगुलेटरी जांचों और पिछले रिलेटेड-पार्टी ट्रांजैक्शंस के नतीजों पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। CFO का हालिया इस्तीफा चिंता की एक और परत जोड़ता है। ये गवर्नेंस से जुड़ी चुनौतियां, इंडस्ट्री के मुकाबले मौजूदा हाई वैल्यूएशन के साथ मिलकर, कंपनी के लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस के लिए मुख्य फैक्टर होंगी।
