Laser Power & Infra: ₹3,200 करोड़ के ऑर्डर से कंपनी को बम्पर ग्रोथ का भरोसा!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Laser Power & Infra: ₹3,200 करोड़ के ऑर्डर से कंपनी को बम्पर ग्रोथ का भरोसा!

कोलकाता की केबल निर्माता Laser Power & Infra को उम्मीद है कि FY27 में रेवेन्यू में डबल-डिजिट ग्रोथ देखने को मिलेगी। कंपनी का ₹3,200 करोड़ का मजबूत ऑर्डर बुक इस भरोसे की वजह है। भारत अपने पावर ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहा है, ऐसे में कंपनी इस साल इन ऑर्डर्स का बड़ा हिस्सा पूरा करने की योजना बना रही है।

₹3,200 करोड़ का ऑर्डर बुक और डबल-डिजिट ग्रोथ का अनुमान

कोलकाता की केबल और कंडक्टर बनाने वाली कंपनी Laser Power & Infra ने 2026-27 फाइनेंशियल ईयर में डबल-डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद जताई है। मार्च 2026 तक कंपनी का ऑर्डर बुक ₹3,200 करोड़ का है। कंपनी के अनुसार, इन ऑर्डर्स का एक बड़ा हिस्सा चालू फाइनेंशियल ईयर में ही पूरा होने वाला है, जिसका असर आने वाली तिमाही के नतीजों में दिख सकता है।

कंपनी का बिजनेस मॉडल

Laser Power & Infra का रेवेन्यू मॉडल काफी हद तक मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट पर टिका है, जिससे कंपनी की कुल आय का करीब 75% हिस्सा आता है। इस सेगमेंट में, केबल की बिक्री से 90% रेवेन्यू आता है, जबकि बाकी 10% कंडक्टर से आता है। केबल बिजनेस में हाई-टेंशन केबल का हिस्सा 30% है, और लो-टेंशन केबल रेलवे सेक्टर के लिए सप्लाई की जाती हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग और नई टेक्नोलॉजी

Laser Power & Infra भारत के पावर नेटवर्क के विस्तार का फायदा उठाने के लिए तैयार है। देश 900 GW के लक्ष्य को पूरा करने के लिए बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ा रहा है, जिसके चलते ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च भी बढ़ा है। यही कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग आउटलुक के लिए एक बड़ा बूस्टर है।

नई पावर लाइनों के लिए जमीन अधिग्रहण जैसी दिक्कतों से निपटने के लिए, कंपनी ने अमेरिका की TS Corporation के साथ पार्टनरशिप की है। यह पार्टनरशिप भारतीय बाजार में एडवांस्ड कंडक्टर टेक्नोलॉजी लाने पर केंद्रित है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों की करंट-कैरींग क्षमता को 2 से 3 गुना तक बढ़ाया जा सकता है। पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाकर, यह पार्टनरशिप मौजूदा ट्रांसमिशन टावरों को बदले बिना क्षमता विस्तार में मदद करेगी।

निवेशकों के लिए खास बातें

निवेशकों को ₹3,200 करोड़ के ऑर्डर बुक के एग्जीक्यूशन पर नजर रखनी चाहिए। बड़ा ऑर्डर बुक भले ही अच्छी विजिबिलिटी दे, लेकिन अंतिम लाभ कंपनी द्वारा कच्चे माल की लागत को मैनेज करने और मार्जिन बनाए रखने पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, शेयरहोल्डर्स नई हाई-कैपेसिटी कंडक्टर टेक्नोलॉजी को अपनाने और उससे मिलने वाले रेवेन्यू पर भी नजर रख सकते हैं। रेलवे और पावर यूटिलिटीज को सप्लाई जारी रहने के कारण, इन सेगमेंट्स में डिमांड की स्थिरता कंपनी के लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण है।

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