Laser Power & Infra Limited ने शेयर बाजार में दमदार शुरुआत की है। कंपनी के शेयर BSE पर ₹214 के इश्यू प्राइस से **26%** ऊपर ₹269 पर लिस्ट हुए। यह इश्यू **₹742 करोड़** जुटाने के बाद आया है, जो ओवरसब्सक्राइब हुआ था। अब निवेशकों की निगाहें कंपनी की कर्ज घटाने की क्षमता पर हैं।
शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री
Laser Power & Infra Limited ने गुरुवार को शेयर बाजार में कदम रखते ही निवेशकों को खुश कर दिया। कंपनी के शेयर BSE पर ₹214 के इश्यू प्राइस की तुलना में 25.7% बढ़कर ₹269 पर लिस्ट हुए। वहीं, NSE पर भी कंपनी की शुरुआत अच्छी रही और शेयर ₹250 पर खुले, जो इश्यू प्राइस से 16.8% ऊपर था। लिस्टिंग के बाद से शेयर लगभग ₹260 के स्तर के आसपास बना हुआ है, जो बाजार में इसकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
यह शानदार लिस्टिंग कंपनी के ₹742 करोड़ के सफल IPO के बाद हुई है। इस पब्लिक इश्यू में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया, जिसमें QIBs (Qualified Institutional Buyers) ने 92.25 गुना, NIIs (Non-Institutional Investors) ने 43.34 गुना और खुदरा निवेशकों (Retail Investors) ने 6.59 गुना तक बोलियां लगाईं।
कर्ज में कमी और भविष्य की योजना
IPO से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल कंपनी कैसे करेगी, यह निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल है। कंपनी ने ₹542 करोड़ के फ्रेश इश्यू में से ₹490 करोड़ अपने मौजूदा कर्ज को चुकाने या प्री-पेमेंट के लिए रखे हैं। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए ज्यादा कर्ज अक्सर मुनाफा और कैश फ्लो पर भारी पड़ता है। ऐसे में, कर्ज में कमी कंपनी की लंबी अवधि की वित्तीय सेहत के लिए अहम साबित होगी।
कर्ज के अलावा, कंपनी के पास ₹3,243 करोड़ का मजबूत ऑर्डर बुक है। यह भविष्य की कमाई को लेकर एक अच्छी तस्वीर पेश करता है, हालांकि इन प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरा होने और पावर केबल व कंडक्टर इंडस्ट्री में लागत प्रबंधन पर इसकी असल कमाई निर्भर करेगी।
प्रमोटरों की हिस्सेदारी और बाजार का मिजाज
IPO में प्रमोटरों दीपक गोयल, राखी गोयल और देवश गोयल ने ऑफर-फॉर-सेल (OFS) के जरिए ₹200 करोड़ के शेयर बेचे। प्रमोटरों द्वारा IPO में शेयर बेचना आम बात है, लेकिन अब निवेशक यह देखेंगे कि बची हुई प्रमोटर हिस्सेदारी और मैनेजमेंट की रणनीति आगे चलकर कैसी रहती है। कंपनी पावर केबल और कंडक्टर बनाती है, जो कॉपर और एल्युमिनियम जैसी कमोडिटी की कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील होते हैं। इसलिए, इन कमोडिटी की कीमतों का कंपनी के मार्जिन पर असर देखना दिलचस्प होगा।
आगे चलकर, कंपनी के लिए अपने ऑर्डर बुक को पूरा करना और वित्तीय नतीजों में कर्ज में कमी की आधिकारिक पुष्टि करना अहम होगा। साथ ही, IPO से बची हुई रकम का सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए कैसे इस्तेमाल होता है, इस पर भी निवेशकों की नजरें रहेंगी।
