Laser Power & Infra के शेयरों ने आज शेयर बाजार में दमदार एंट्री की है। कंपनी के शेयर ₹214 के इश्यू प्राइस से **26%** ऊपर ₹270 पर लिस्ट हुए। IPO में **39** गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिलने के बाद अब निवेशक इस बात पर नजरें टिकाए हैं कि कंपनी IPO से जुटाई गई **₹742 करोड़** की रकम का इस्तेमाल कर्ज घटाने में कैसे करेगी।
लिस्टिंग पर 26% का बम्पर उछाल!
Laser Power & Infra Limited ने गुरुवार को शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर कंपनी के शेयर ₹270 के भाव पर खुले, जो इसके IPO इश्यू प्राइस ₹214 से 26% ज्यादा है। दोपहर तक, स्टॉक करीब 23% की मजबूती के साथ ₹263.82 पर कारोबार कर रहा था। इस मजबूत लिस्टिंग के साथ, कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹3,705 करोड़ हो गया है।
₹742 करोड़ IPO से क्या करेगी कंपनी?
निवेशकों की नजर अब कंपनी की कैपिटल एलोकेशन स्ट्रैटेजी पर है। IPO से जुटाए गए ₹742 करोड़ में से लगभग 90% राशि का इस्तेमाल मौजूदा कर्ज चुकाने में किया जाएगा। कंपनी पर कुल ₹490 करोड़ का कर्ज है। कर्ज का बोझ कम करके, कंपनी अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करना चाहती है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए एक आम रणनीति है, जिससे वे ब्याज लागत कम कर सकें और भविष्य में मुनाफा बढ़ा सकें।
मजबूत ऑर्डर बुक और कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड
Laser Power & Infra का पावर ट्रांसमिशन प्रोडक्ट्स के मैन्युफैक्चरिंग में तीन दशकों से ज्यादा का अनुभव है। कंपनी के पश्चिम बंगाल में तीन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 85,448 मीट्रिक टन है। कंपनी की सबसे बड़ी ताकत इसकी ₹3,243 करोड़ की ऑर्डर बुक है, जो आने वाली तिमाहियों के लिए रेवेन्यू की अच्छी विजिबिलिटी देती है। यह कंपनी इंडियन रेलवेज को भी सप्लाई करती है और रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) से मान्यता प्राप्त है, जो इसे पावर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में एक मजबूत खिलाड़ी बनाती है।
सेक्टर की चुनौतियाँ और आगे क्या?
भारत में पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन टाइमलाइन और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियाँ आम हैं। चूंकि कंपनी मैन्युफैक्चरिंग और EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, और कंस्ट्रक्शन) दोनों क्षेत्रों में काम करती है, इसलिए इसकी प्रॉफिटेबिलिटी इन फैक्टर्स पर निर्भर करती है। कंपनी के लिए अपनी मौजूदा ऑर्डर बुक को बिना लागत बढ़े और देरी के पूरा करना महत्वपूर्ण होगा। निवेशक इस बात पर भी नजर रखेंगे कि कर्ज कम होने से कंपनी के कैश फ्लो में कितना सुधार होता है और मैनेजमेंट बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक कैसे डिलीवर करता है।
