L&T के Buildings & Factories डिवीजन ने गुजरात में एक बड़े फ्लोट ग्लास प्लांट (Float Glass Plant) के डिजाइन और निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है। इसके साथ ही, कंपनी आंध्र प्रदेश में एक प्रमुख टू-व्हीलर निर्माता के लिए नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी भी बनाएगी। गुवाहाटी, असम में जल प्रबंधन प्रोजेक्ट के लिए भी कंपनी को डिजाइन-बिल्ड-ऑपरेट कॉन्ट्रैक्ट मिला है। ये बड़े प्रोजेक्ट्स कंपनी के मजबूत ऑर्डर बुक में इजाफा करते हैं।
Larsen & Toubro का मौजूदा ऑर्डर बुक ₹7.33 लाख करोड़ का है, जो इसके घरेलू प्रतिद्वंद्वियों NCC और KEC International से काफी बड़ा है। हालांकि, इन बड़े घरेलू ऑर्डर्स के बावजूद, पिछले एक महीने में L&T के शेयर में लगभग 22% की गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव बताया जा रहा है।
इसके बावजूद, ज्यादातर एनालिस्ट्स L&T को 'Strong Buy' रेटिंग दे रहे हैं और 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹4,500 से ₹4,700 के बीच बता रहे हैं। हाल ही में UBS ने मिडिल ईस्ट के भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए L&T का टारगेट प्राइस थोड़ा घटाया है। भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर FY26 में 6-8% बढ़ने की उम्मीद है, जो कंपनी के लिए सकारात्मक है।
हालांकि, मिडिल ईस्ट संघर्ष, खासकर जलमार्गों (जैसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में बाधा, लॉजिस्टिक्स को प्रभावित कर रहा है और बीमा लागत बढ़ा रहा है। L&T का 35% से अधिक रेवेन्यू मिडिल ईस्ट से आता है, और वहां के कई कॉन्ट्रैक्ट फिक्स्ड-प्राइस (Fixed-Price) होने के कारण कच्चे माल, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। शेयर की हालिया गिरावट (लगभग ₹3,305 तक) इन परिचालन और वित्तीय जोखिमों को दर्शाती है। कुछ एनालिस्ट्स ने मार्च 2026 में अपनी रेटिंग 'Buy' से 'Hold' कर दी है।
विश्लेषकों का लंबी अवधि का आउटलुक पॉजिटिव है, खासकर भारत के बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में L&T की मजबूत पकड़ और ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल्स व डिफेंस जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार को देखते हुए। अगले दो सालों के लिए कंपनी के पास पर्याप्त रेवेन्यू विजिबिलिटी है। लेकिन, निकट भविष्य में प्रदर्शन भू-राजनीतिक जोखिमों को मैनेज करने, सप्लाई चेन को स्थिर करने और लागत को नियंत्रित करने की L&T की क्षमता पर निर्भर करेगा।