Larsen & Toubro ने मिडिल ईस्ट में अपना दबदबा कायम रखते हुए जुलाई से अब तक 13 नए कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल किए हैं। इसमें **₹15,000 करोड़** से ज्यादा का एक अल्ट्रा-मेगा ऑफशोर प्रोजेक्ट भी शामिल है, जिससे कंपनी का इंटरनेशनल ऑर्डर बुक अब कुल ऑर्डर का **52%** हो गया है।
इंटरनेशनल मार्केट में L&T का दम
Larsen & Toubro (L&T) ने एक बार फिर अपनी इंजीनियरिंग क्षमता का लोहा मनवाया है। कंपनी ने जुलाई 2026 की शुरुआत से ही मिडिल ईस्ट में 13 नए प्रोजेक्ट्स जीत लिए हैं। इनमें सबसे बड़ा आकर्षण ₹15,000 करोड़ से अधिक का अल्ट्रा-मेगा ऑफशोर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट है। फिलहाल L&T का शेयर ₹4,083 के आसपास कारोबार कर रहा है। यह कामयाबी Gulf Cooperation Council (GCC) देशों में बढ़ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर के निवेश का फायदा उठाने की कंपनी की सटीक रणनीति को दर्शाती है।
ऑर्डर बुक में बड़ा बदलाव
अब L&T के लिए इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स का महत्व बढ़ गया है। कंपनी की कुल ऑर्डर बुक में इंटरनेशनल हिस्सेदारी 52% तक पहुंच गई है। यह बदलाव निवेशकों के लिए अहम है क्योंकि इससे घरेलू बाजार के आर्थिक उतार-चढ़ाव (Economic Cycles) से कंपनी को सुरक्षा मिलती है। कंपनी अब हाई-वैल्यू और जटिल इंजीनियरिंग वाले ऑफशोर और गैस कंप्रेसन प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां और रिस्क
इतने बड़े ऑर्डर्स के बावजूद, मिडिल ईस्ट में काम करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। इस क्षेत्र की भू-राजनीतिक अस्थिरता (Geopolitical Instability) के कारण प्रोजेक्ट में देरी और सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जिसका सीधा असर प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है। हाइड्रोकार्बन सेगमेंट में पहले से ही मार्जिन पर दबाव है।
निवेशकों को अब आने वाली तिमाही नतीजों (Quarterly Results) पर नजर रखनी चाहिए, ताकि यह देखा जा सके कि कंपनी इन जटिल प्रोजेक्ट्स को कैसे एग्जीक्यूट कर रही है और क्या वह बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों के बीच मुनाफे को स्थिर रख पाती है या नहीं।
