Larsen & Toubro ने अपना भविष्य का खाका तैयार कर लिया है। कंपनी **FY31** तक अपनी ऑर्डर बुक को **₹15 लाख करोड़** तक पहुंचाने की तैयारी में है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी अब भारतीय बाजार के बजाय इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा दांव लगा रही है।
Larsen & Toubro ने अगले पांच-छह सालों के लिए एक महत्वाकांक्षी ग्रोथ रोडमैप पेश किया है। इंजीनियरिंग जगत की दिग्गज कंपनी अब अपनी रणनीति में बड़े बदलाव कर रही है ताकि घरेलू बाजार में हो रही देरी और पेमेंट से जुड़ी दिक्कतों से बचा जा सके।
ग्लोबल मार्केट पर कंपनी का दांव
कंपनी का मैनेजमेंट अब इंटरनेशनल रेवेन्यू की हिस्सेदारी को 50% से बढ़ाकर 60% करने की योजना बना रहा है। इसमें सऊदी अरब मुख्य केंद्र है, जहां कंपनी का $30 बिलियन का पोर्टफोलियो पहले से ही मजबूत है। कंपनी ने नोट किया है कि भारत में प्रोजेक्ट्स की समय-सीमा में 25% तक की देरी होती है, जिसके चलते यह बदलाव अनिवार्य हो गया है।
घरेलू मार्केट में रणनीति में बदलाव
L&T ने अब जल जीवन मिशन जैसे 'लास्ट-माइल' वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट्स से पीछे हटने का फैसला किया है, क्योंकि वहां पेमेंट में देरी और प्रोजेक्ट रुकने की समस्याएं लगातार बनी रहती हैं। अब कंपनी देश में सिर्फ उन प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देगी जो अधिक स्थिर हैं, जैसे कि डिसेलिनेशन प्लांट्स (Desalination Plants)।
टेक्नोलॉजी और नए वर्टिकल्स
कार्यबल की कमी को देखते हुए, कंपनी ने महाराष्ट्र में ₹300 करोड़ की लागत से एक नया ऑटोमेशन सेंटर स्थापित किया है। साथ ही, कंपनी सेमीकंडक्टर डेवलपमेंट में हर तिमाही ₹100 करोड़ का निवेश कर रही है। भविष्य में विंड एनर्जी और यूके-मोरक्को जैसे अंतरराष्ट्रीय सब-सी ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स कंपनी के ग्रोथ के मुख्य ड्राइवर होंगे। निवेशकों के लिए कंपनी का मार्जिन और इन नए हाई-टेक प्रोजेक्ट्स का एग्जीक्यूशन देखना अब सबसे अहम होगा।
