इन्फ्रास्ट्रक्चर दिग्गज Larsen & Toubro (L&T) ने अगले **5** सालों में ग्लोबल मॉडुलर कंस्ट्रक्शन मार्केट से **$30 बिलियन** के कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी अपनी भारतीय मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों का इस्तेमाल कर विदेश में प्रोजेक्ट्स पूरा करेगी।
Larsen & Toubro (L&T) अब अपनी पहुंच को घरेलू सीमाओं से बाहर ले जाने की तैयारी में है। कंपनी का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में ग्लोबल मॉडुलर कंस्ट्रक्शन सेगमेंट में $30 बिलियन के ऑर्डर हासिल करना है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारत के आर्थिक चक्र (Economic Cycle) पर निर्भरता को कम करना और ग्लोबल मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना है।
मॉडुलर कंस्ट्रक्शन क्या है?
पारंपरिक कंस्ट्रक्शन के उलट, इसमें बड़े स्ट्रक्चर्स को सीधे साइट पर बनाने के बजाय, कंट्रोल फैक्ट्री माहौल में तैयार किया जाता है। L&T अपनी कट्टुपल्ली (Kattupalli) और हजीरा (Hazira) फैसिलिटीज का उपयोग करेगी। इससे लेबर की कमी और खराब मौसम के कारण काम में होने वाली देरी जैसी समस्याओं से निजात मिलेगी।
सफल ट्रायल और आगे की राह
कंपनी ने इस मॉडल को पहले ही साबित कर दिया है। हाल ही में, L&T ने पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के 'Project CERES' यूरिया प्लांट के लिए 110 मॉड्यूल्स सफलतापूर्वक डिलीवर किए हैं। यह सफलता यह दिखाती है कि कंपनी इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स की जटिलताओं को संभालने में सक्षम है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
निवेशकों की नजर इस बात पर होनी चाहिए कि यह नया सेगमेंट कंपनी के कुल ऑर्डर बुक का कितना हिस्सा बनता है। हालांकि यह एक बड़ा अवसर है, लेकिन इसकी सफलता शिपिंग और लॉजिस्टिक्स की लागत को कंट्रोल करने पर निर्भर करेगी। कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा भी कंपनी के मार्जिन (Profit Margin) को प्रभावित कर सकती है।
