L&T का ग्रीन हाइड्रोजन पर बड़ा दांव: क्या 'हरा' भविष्य दिलाएगा कंपनी को ग्लोबल पहचान?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
L&T का ग्रीन हाइड्रोजन पर बड़ा दांव: क्या 'हरा' भविष्य दिलाएगा कंपनी को ग्लोबल पहचान?
Overview

Larsen & Toubro (L&T) ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रोलाइज़र के तेजी से बढ़ते बाज़ार में अपनी पैठ मज़बूत कर रहा है। कंपनी अपनी विशाल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और लागत के फायदों का इस्तेमाल करके ग्लोबल मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने की राह पर है।

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L&T की 'ग्रीन' स्ट्रैटेजी: भविष्य की ऊर्जा का निर्माण

Larsen & Toubro (L&T) इस उभरते हुए 'ग्रीन हाइड्रोजन' और 'इलेक्ट्रोलाइज़र' के सेक्टर में अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटी है। कंपनी का लक्ष्य इसे एक नए और तेज़ी से बढ़ते बिज़नेस के तौर पर स्थापित करना है। यह कदम ग्लोबल एनर्जी पॉलिसी और सप्लाई चेन में हो रहे बड़े बदलावों का फायदा उठाएगा, और भारतीय दिग्गज को यूरोपीय निर्माताओं के सामने एक मजबूत दावेदार बनाएगा।

ग्लोबल डिमांड के लिए हो रही है तैयारी

ग्रीन हाइड्रोजन और अमोनिया के उत्पादन में बाज़ार की बढ़ती मांग को देखते हुए, L&T अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है। अनुमान है कि ग्लोबल ग्रीन हाइड्रोजन बाज़ार 2026 में $17.28 बिलियन से बढ़कर 2035 तक $231.32 बिलियन का हो जाएगा, जिसकी CAGR (चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) 34.09% रहने की उम्मीद है। इस मांग को पूरा करने के लिए, L&T अपने इलेक्ट्रोलाइज़र मॉड्यूल्स को 0.5 MW से बढ़ाकर 4 MW यूनिट्स तक ले जा रहा है, जो अभी टेस्टिंग में हैं। ये सबसे पहले इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के पानीपत रिफाइनरी में इस्तेमाल होंगे, जिसके बाद L&T अंतरराष्ट्रीय एक्सपोर्ट पर ध्यान केंद्रित करेगा। कंपनी उन क्षेत्रों को टारगेट कर रही है जहाँ नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) सस्ती और भरपूर मात्रा में उपलब्ध है, जैसे पश्चिम एशिया और एशिया के अन्य हिस्से। यहाँ ग्राहक लगातार वैकल्पिक सप्लायर की तलाश में हैं। L&T की रणनीति लागत प्रतिस्पर्धा पर आधारित है, जो यूरोपीय प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले मार्केट शेयर हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण है। हाइड्रोजन के अलावा, L&T अपने रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो का भी विस्तार कर रहा है, खासकर यूरोप में 4 गीगावाट के ऑफशोर विंड प्लेटफॉर्म्स सुरक्षित किए हैं, और 4 गीगावाट की और भी संभावनाएं हैं। साथ ही, उभरते बाज़ारों में सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहा है।

बाज़ार की चाल और मुकाबला

ग्लोबल इलेक्ट्रोलाइज़र मार्केट काफी कॉम्पिटिटिव है, जहाँ प्रमुख उत्पादन क्षमता चीन, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में केंद्रित है। LONGi Hydrogen, Plug Power, Bloom Energy और Siemens Energy जैसी बड़ी कंपनियाँ तेज़ी से अपनी मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा रही हैं। L&T फ्रांस की McPhy Energy से लाइसेंस प्राप्त प्रेशर वाली अल्कलाइन इलेक्ट्रोलाइज़र टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रहा है। कंपनी ने गुजरात के हज़ीरा में अपना पहला 1 MW इलेक्ट्रोलाइज़र कमीशन किया है। हालाँकि एशिया पैसिफिक क्षेत्र 2025 में ग्रीन हाइड्रोजन मार्केट में 47.40% से ज़्यादा हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहने का अनुमान है, वहीं यूरोप में सबसे तेज़ ग्रोथ की उम्मीद है। L&T का P/E रेशियो, मार्च 2026 तक 24.90 से 32.0255 के बीच है, जो बताता है कि निवेशक ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं, हालाँकि यह भारतीय कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के औसत से प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹4.72 ट्रिलियन है। L&T की सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) साख भी मज़बूत है, ENR द्वारा इसे ग्लोबल लेवल पर दूसरी सबसे अच्छी पर्यावरण फर्म का दर्जा दिया गया है और MSCI से 'A' ESG रेटिंग मिली है।

भू-राजनीतिक जोखिम और वित्तीय दांव

अपनी बड़ी रणनीतिक चालों के बावजूद, L&T की ग्रीन एनर्जी महत्वाकांक्षाओं पर कई बड़े जोखिम मंडरा रहे हैं। कंपनी का मिडिल ईस्ट (Middle East) में काफी एक्सपोज़र है, जो उसके कुल ऑर्डर बुक का 37% और FY26 के पहले नौ महीनों में ऑर्डर इनफ्लो का 33% है। ऐसे में यह भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) के प्रति संवेदनशील है। मार्च 2026 की शुरुआत में हुए भू-राजनीतिक तनावों के कारण L&T के शेयर में लगभग 7-8% की गिरावट आई थी। एक बड़ा जोखिम यह है कि मिडिल ईस्ट के 55% ऑर्डर फिक्स्ड-प्राइस हैं, जिसका मतलब है कि यदि संघर्ष के कारण लागत बढ़ती है तो मार्जिन कम हो सकता है। इसके अलावा, L&T को LONGi जैसी ग्लोबल कंपनियों से कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है, जिनकी 5,000 MW की उत्पादन क्षमता L&T के मौजूदा पैमाने से कहीं ज़्यादा है। इस सेक्टर की भारी पूंजी ज़रूरतों और बदलते नियमों के कारण भी चुनौतियां बनी हुई हैं। लगभग INR 1.32 ट्रिलियन के डेट (Debt) के साथ, इस सेक्टर की अस्थिरता पर करीबी नज़र रखने की ज़रूरत है।

विश्लेषकों की राय और भविष्य का नज़रिया

विश्लेषक (Analysts) इस स्थिति को लेकर सतर्क लेकिन आशावादी हैं। Macquarie और CLSA जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने 'आउटपरफॉर्म' (Outperform) रेटिंग दी है, लेकिन मिडिल ईस्ट के फिक्स्ड-प्राइस कॉन्ट्रैक्ट्स से मार्जिन जोखिमों के प्रति आगाह किया है। Axis Capital का मानना है कि हालिया स्टॉक गिरावट शायद समय से पहले है, लेकिन लंबा संघर्ष आय के पूर्वानुमानों (earnings forecasts) को संशोधित करने पर मजबूर कर सकता है। L&T ने अपने पूरे साल के गाइडेंस को बनाए रखा है, जिसमें FY26 के लिए 10% से अधिक ऑर्डर इनफ्लो ग्रोथ, 15% रेवेन्यू ग्रोथ और 8% कोर मार्जिन की उम्मीद है। यह ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद मैनेजमेंट का विश्वास दर्शाता है। कंपनी ग्रीन एनर्जी में बड़ा निवेश करने की योजना बना रही है, जिसका लक्ष्य बड़े पैमाने पर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन सुविधाएं स्थापित करना है, और यह अपनी एनर्जी ट्रांज़िशन (Energy Transition) रणनीति की पुष्टि करता है।

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