Larsen & Toubro को उज्बेकिस्तान के नए Tashkent International Airport के लिए 'Limited Notice to Proceed' मिल गया है। यह एक अल्ट्रा-मेगा प्रोजेक्ट है, जो कंपनी के इंटरनेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत
Larsen & Toubro ने उज्बेकिस्तान में न्यू Tashkent International Airport के लिए शुरुआती इंजीनियरिंग और डिजाइन का काम शुरू कर दिया है। कंपनी ने इसे 'अल्ट्रा-मेगा' कैटेगरी में रखा है, जिसका सीधा मतलब है कि इस ऑर्डर की वैल्यू ₹15,000 करोड़ से भी अधिक है। फिलहाल कंपनी को 'Limited Notice to Proceed' मिला है, जो कि बड़े प्रोजेक्ट्स में एक सामान्य प्रक्रिया है। इसके जरिए कंपनी मेन कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्ट साइन होने से पहले प्लानिंग और डिजाइन जैसे जरूरी काम पूरे कर सकती है।
सेंट्रल एशिया में विस्तार की रणनीति
अब तक L&T का फोकस ज्यादातर मिडिल ईस्ट प्रोजेक्ट्स पर रहा है, लेकिन यह डील कंपनी की बदलती स्ट्रैटेजी को दर्शाती है। यह प्रोजेक्ट $3 बिलियन के पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) का हिस्सा है। इस एयरपोर्ट का दायरा 1,310 हेक्टेयर में फैला होगा, जिसमें 4 किमी के दो रनवे, एक विशाल पैसेंजर टर्मिनल और हर साल 1,29,000 टन माल संभालने की क्षमता वाला कार्गो फैसिलिटी शामिल है।
निवेशकों के लिए अहम पड़ाव
इन्वेस्टर्स की नजर अब इस पर होगी कि कब कंपनी को 'Full Notice to Proceed' मिलता है, क्योंकि असली रेवेन्यू और काम की रफ्तार उसी के बाद बढ़ेगी। इस प्रोजेक्ट में Vision International Investment Company, Sojitz Corporation और Incheon International Airport Corporation जैसे बड़े इंटरनेशनल पार्टनर्स शामिल हैं, जिससे प्रोजेक्ट का मैनेजमेंट काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
चुनौतियां और रिस्क
इंटरनेशनल मार्केट में काम करना जोखिम भरा भी होता है। विदेशी मुद्रा की कीमतों में उतार-चढ़ाव, स्थानीय लेबर कानून और रेगुलेटरी माहौल के बीच प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखना कंपनी के लिए बड़ी परीक्षा होगी। 2026 से 2030 की समयसीमा के भीतर इस जटिल प्रोजेक्ट को पूरा करना L&T की लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस के लिए बेहद क्रिटिकल साबित होगा। मार्केट अब कॉन्ट्रैक्ट की बाकी शर्तों के पूरा होने का इंतजार कर रहा है, जो असल निर्माण कार्य शुरू होने की पुष्टि करेगा।
