Engineering दिग्गज Larsen & Toubro (L&T) अपने बिज़नेस मॉडल में बड़ा बदलाव कर रही है। कंपनी अब 'एसेट-लाइट' मॉडल से हटकर खुद के हाई-ग्रोथ इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को ओनरशिप (Ownership) के साथ चलाएगी। इसके लिए Vyoma.AI के जरिए डेटा सेंटर और ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर पर फोकस किया जा रहा है ताकि लंबी अवधि तक कमाई जारी रहे।
पिछले एक दशक से Larsen & Toubro मुख्य रूप से क्लाइंट्स के लिए प्रोजेक्ट्स बनाने वाली कंपनी रही है। लेकिन अब कंपनी की रणनीति बदल गई है। इंजीनियरिंग की यह दिग्गज कंपनी अब नई पीढ़ी के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बनाने के बजाय उन्हें खुद अपने पास रखने (Own करने) की तैयारी में है, जिससे उसे हर महीने या सालाना बेसिस पर स्थिर कमाई (Recurring Revenue) मिल सके।
डिजिटल और ग्रीन एनर्जी पर बड़ा दांव
कंपनी ने अपनी डिजिटल सर्विस को नई ऊंचाई देने के लिए डेटा सेंटर बिज़नेस को अपनी सहायक कंपनी Vyoma.AI में ट्रांसफर किया है, जिसका वैल्यूएशन ₹1,400 करोड़ आंका गया है। नवी मुंबई में 40-मेगावाट का AI-रेडी डेटा सेंटर बन रहा है और भविष्य में इसे 200-मेगावाट तक ले जाने का लक्ष्य है।
इसी तरह, एनर्जी सेक्टर में L&T Energy GreenTech के माध्यम से कंपनी ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के पानीपत रिफाइनरी के लिए ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट हाथ में लिया है। इसे 'बिल्ड-ओन-ऑपरेट' (BOO) मॉडल के तहत अगले 25 साल तक L&T खुद ऑपरेट करेगी, जिससे एक लॉन्ग-टर्म आय का रास्ता खुलेगा।
निवेशकों के लिए संकेत
यह बदलाव कंपनी के भविष्य के लिए अच्छा है, लेकिन इसमें चुनौतियां भी हैं। डेटा सेंटर और हाइड्रोजन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भारी मात्रा में 'अपफ्रंट कैपिटल' (Upfront Capital) की जरूरत होती है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी को अपने कैश फ्लो और कर्ज के स्तर को बहुत बारीकी से मैनेज करना होगा। इसके अलावा, प्रोजेक्ट में देरी या बढ़ती प्रतिस्पर्धा से मार्जिन पर असर पड़ सकता है, जिस पर निवेशकों की नज़र बनी रहेगी।
