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L&T Share Price: पश्चिम एशिया तनाव का असर! शेयर **20%** गिरे, पर कंपनी का ऑपरेशन फर्स्ट क्लास

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
L&T Share Price: पश्चिम एशिया तनाव का असर! शेयर **20%** गिरे, पर कंपनी का ऑपरेशन फर्स्ट क्लास
Overview

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते Larsen & Toubro (L&T) के शेयरों में भारी गिरावट आई है। कंपनी के शेयर अपने 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर से **20%** से अधिक गिरकर बियर मार्केट टेरेटरी में पहुंच गए हैं। हालांकि, कंपनी ने आश्वासन दिया है कि उसके **95%** रीजनल ऑपरेशन्स सामान्य रूप से चल रहे हैं, जबकि केवल **5%** साइट्स पर ही रुकावट आई है।

बाजार डरा, पर L&T का ऑपरेशन जारी!

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने Larsen & Toubro (L&T) के शेयर को हिलाकर रख दिया है। शेयर अपने 52-हफ्ते के टॉप लेवल से 20% से भी ज्यादा लुढ़क चुके हैं और अब बियर मार्केट में आ गए हैं। हालिया गिरावट 2 अप्रैल 2026 को करीब 4% और बढ़ गई। कंपनी का अंतरराष्ट्रीय कारोबार पश्चिम एशिया पर काफी निर्भर है, जहां इसके कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक का 49% हिस्सा आता है, जिसमें 80% से ज्यादा UAE, सऊदी अरब और गल्फ क्षेत्र से है।

बाजार की चिंता के विपरीत, L&T ने बताया है कि पश्चिम एशिया में उसके 100 ऑपरेटिंग साइट्स में से 95% सामान्य रूप से काम कर रही हैं। केवल 5% साइट्स पर ही क्षेत्रीय तनाव के कारण काम रुका है या बाधित हुआ है। यह जमीनी हकीकत बाजार की उस प्रतिक्रिया से बिल्कुल अलग है, जहाँ निवेशक भू-राजनीतिक डर को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। L&T के शेयर की गिरावट Nifty 50 इंडेक्स के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज रही, जो इसी अवधि में करीब 9.3% लुढ़का था।

लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें और बढ़ती लागत

L&T ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के तुरंत असर का भी खुलासा किया है। कंपनी के कलेक्शन पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन यूरोप और चीन से सप्लाई बाधित होने के कारण लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन में चुनौतियां आ रही हैं। इस स्थिति का असर भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर भी दिख रहा है। बिटुमेन जैसे मटेरियल की कीमतों में उछाल के कारण कंस्ट्रक्शन कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है।

रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि कंस्ट्रक्शन कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन FY2020-21 में 13.0%–14.0% से घटकर FY2025-26 में 10.3%–10.8% रह सकते हैं। अगर यह संघर्ष जारी रहा तो भारत के लिए निर्माण लागत 5% तक बढ़ सकती है। हॉरमूज जलडमरूमध्य जैसे शिपिंग रूट्स का बाधित होना भारत के आयात-निर्यात के लिए भी चिंता का विषय है, जो पश्चिम एशिया क्षेत्र से गहराई से जुड़े हुए हैं।

वैल्यूएशन: डर या खरीदारी का मौका?

बाजार के इस दबाव के बावजूद, L&T की फंडामेंटल स्ट्रेंथ और भविष्य की संभावनाएं विश्लेषकों का ध्यान खींच रही हैं। कंपनी का P/E रेश्यो, जो मार्च/अप्रैल 2026 में लगभग 26.15-28.21 था, कई स्पेशलाइज्ड इंडस्ट्री पीयर्स की तुलना में आकर्षक है, हालांकि यह BSE इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर इंडेक्स के 16.5 P/E से अधिक है। वहीं, Siemens 68.19 और CG Power & Industrial Solutions 100.37 के P/E पर ट्रेड कर रहे हैं।

UBS के कुछ विश्लेषकों ने नॉन-एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और डोमेस्टिक एग्जीक्यूशन में रिस्क बताए हैं, लेकिन Macquarie जैसी फर्मों ने ₹4,910 के टारगेट के साथ 'ओवरवेट' रेटिंग बरकरार रखी है। वे इस गिरावट को स्टॉक को अच्छे वैल्यू पर खरीदने का मौका मान रहे हैं। Goldman Sachs ने भी दिसंबर 2025 में अपना प्राइस टारगेट कम करने के बाद L&T को 'बाय' रेटिंग देते हुए ₹5,000 का लक्ष्य रखा था। उन्होंने डिफेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और न्यूक्लियर पावर जैसे क्षेत्रों में ग्रोथ की उम्मीद जताई है, जिनसे ऑर्डर इनफ्लो बढ़ने की उम्मीद है।

कुल 34 विश्लेषकों में से 29 'बाय' रेटिंग की सलाह दे रहे हैं। कंपनी के पास ₹5.79 लाख करोड़ का बड़ा ऑर्डर बुक भी है, जिसमें Q3 FY'26 में ऑर्डर इनफ्लो में 30% का सालाना इजाफा देखा गया, जो भविष्य की कमाई के लिए मजबूत विजिबिलिटी देता है।

मार्केट में मजबूत पकड़ और फाइनेंशियल हेल्थ

L&T भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में दबदबा रखती है, जो मार्च 2026 तक सेक्टर के मार्केट कैपिटलाइजेशन का लगभग 41% था। कंपनी का ऑपरेशनल परफॉरमेंस मजबूत है, जिसका रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) 17.47% और रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 15.82% है। सप्लाई चेन में रुकावटों के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को लागत दबाव और मार्जिन में कमी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन L&T के विविध बिजनेस सेगमेंट और मजबूत एग्जीक्यूशन क्षमताएं इसे सहारा देती हैं।

चुनौतियां और चिंताएं

L&T भी रिस्क से अछूती नहीं है। शेयरों के बियर मार्केट में जाने का तात्कालिक कारण पश्चिम एशिया का संघर्ष है, जो सीधे तौर पर इसके बड़े रीजनल ऑर्डर बुक और ऑपरेशन्स को प्रभावित करता है। ऑपरेशनल रुकावटों के अलावा, यह संघर्ष भविष्य के ऑर्डर इनफ्लो और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन को भी प्रभावित कर सकता है। UBS ने L&T के नॉन-एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट में संभावित समस्याएं बताई हैं और डोमेस्टिक प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन पर चिंता जताई है।

इसके अलावा, 2025 के अंत में चेयरमैन एस.एन. सुब्रमण्यम की 90-घंटे के कार्य सप्ताह की वकालत करने वाली विवादास्पद टिप्पणी की काफी आलोचना हुई थी। ऐतिहासिक रूप से, 2011 और 2016 के बीच चेन्नई कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट से जुड़े एक कथित रिश्वतखोरी मामले में L&T के अधिकारी शामिल पाए गए थे, जो अतीत के गवर्नेंस मुद्दों को दर्शाते हैं। हालांकि मार्च 2026 में टेक्निकल इंडिकेटर्स 'माइल्डली बुलिश' से 'माइल्डली बेयरिश' हो गए थे, जिससे कुछ प्लेटफॉर्म्स ने रेटिंग 'बाय' से 'होल्ड' कर दी थी, यह कंपनी के मजबूत फंडामेंटल्स और आकर्षक वैल्यूएशन के विपरीत है।

भविष्य का ग्रोथ इंजन: ग्रीन एनर्जी पर फोकस

L&T भविष्य की ग्रोथ के लिए सक्रिय रूप से खुद को तैयार कर रही है, खासकर एनर्जी ट्रांज़िशन और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में। ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया, इलेक्ट्रोलाइजर्स, रिन्यूएबल्स ईपीसी (EPC) और यूरोप में ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट्स इसके मुख्य फोकस एरिया हैं। Goldman Sachs ने डिफेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और न्यूक्लियर पावर जैसे उभरते क्षेत्रों को प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर बताया है, जिनके 2035 तक मार्केट में काफी विस्तार की उम्मीद है। कंपनी की स्ट्रेटेजिक प्लानिंग में अपने सभी बिजनेस में डीकार्बोनाइजेशन शामिल है, जो ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी ट्रेंड्स के प्रति इसके झुकाव को दर्शाता है। ये भविष्योन्मुखी प्रयास रेवेन्यू को डाइवर्सिफाई करने और बदलते बाजार की मांगों का फायदा उठाने के लिए किए जा रहे हैं, जो मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों का मुकाबला करने में मदद कर सकते हैं।

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