Larsen & Toubro (L&T) ने इस तिमाही में अपनी अब तक की सबसे बड़ी ऑर्डर इनफ्लो ₹1.35 लाख करोड़ हासिल कर सबको चौंका दिया है। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और एनर्जी प्रोजेक्ट्स में बड़े डोमेस्टिक और इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स मिलने से यह उछाल आया है। इसके साथ ही, कंपनी का कंसॉलिडेटेड ऑर्डर बुक एक रिकॉर्ड स्तर पर ₹7.33 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह बड़ा बैकलॉग आने वाले समय के लिए कंपनी की कमाई की अच्छी विजिबिलिटी (visibility) देता है। कंपनी के प्रॉस्पेक्ट पाइपलाइन में भी 7% का सालाना इजाफा होकर यह ₹5.9 ट्रिलियन हो गया है, जो नए बिजनेस डेवलपमेंट के प्रयासों को दिखाता है।
जहां तक नतीजों का सवाल है, 31 दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही में L&T का रेवेन्यू सालाना आधार पर 10% बढ़कर ₹71,450 करोड़ रहा। हालांकि, नेट प्रॉफिट 4% घटकर ₹3,215 करोड़ रह गया। इस गिरावट की मुख्य वजह नए लेबर कोड को लागू करने से जुड़ा ₹1,191 करोड़ (टैक्स के बाद) का एक-मुश्त प्रोविजन (provision) था। इसके बावजूद, कोर ऑपरेशन्स से रेवेन्यू में मजबूती बनी रही।
इस मजबूत प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए, ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने L&T पर अपना 'BUY' रेटिंग बरकरार रखा है। उन्होंने शेयर का टारगेट प्राइस ₹4,500 से बढ़ाकर ₹4,600 कर दिया है। यह अपग्रेड कंपनी के लॉन्ग-टर्म आउटलुक में निरंतर विश्वास को दर्शाता है, भले ही कुछ सेगमेंट्स में एग्जीक्यूशन की स्पीड में थोड़ी नरमी की आशंका हो।
यह तेजी ऐसे समय में आई है जब इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर सरकारी खर्चों में बढ़ोतरी और आगामी यूनियन बजट में फोकस से लाभान्वित होने की उम्मीद कर रहा है। यह L&T जैसी कंपनियों के लिए प्रोजेक्ट अवार्ड्स और एग्जीक्यूशन के लिए एक अनुकूल माहौल बनाता है।