मिडिल ईस्ट के तनाव का बड़ा झटका
Larsen & Toubro (L&T) के शेयर 2 मार्च 2026 को इंट्रा-डे में 7% लुढ़क कर ₹3,960.20 के स्तर पर आ गए। यह पिछले लगभग एक साल में स्टॉक में आई सबसे बड़ी इंट्रा-डे गिरावट है। इस तेज बिकवाली की सीधी वजह मिडिल ईस्ट में गहराता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ी अस्थिरता के चलते निवेशकों ने जोखिम वाली संपत्तियों से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है।
यह अस्थिरता L&T के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि कंपनी की इंटरनेशनल ऑर्डर बुक का लगभग 75% हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है, जिसकी कुल वैल्यू ₹3.57 ट्रिलियन है। इसी वजह से, स्टॉक अपने हालिया ऑल-टाइम हाई ₹4,440 से अब तक 11% गिर चुका है।
भू-राजनीति के पीछे छिपी कंपनी की ताकत
मिडिल ईस्ट के घटनाक्रमों का असर भले ही शेयरों पर दिख रहा हो, लेकिन L&T की असल ताकत उसके घरेलू कारोबार में है। सरकार का लगातार कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure), प्राइवेट सेक्टर के बढ़ते निवेश और डिफेंस, ग्रीन एनर्जी व टेक्नोलॉजी सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में बढ़ते मौके कंपनी के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। 2026-27 के यूनियन बजट में ₹12.2 लाख करोड़ के पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रस्ताव इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देगा और कैपिटल गुड्स (Capital Goods) सेक्टर के लिए लगातार मांग बनाए रखेगा।
L&T ने Q3 FY26 में अब तक की सबसे ज्यादा तिमाही ऑर्डर इनफ्लो (Order Inflow) दर्ज की, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 17% बढ़कर ₹1.36 ट्रिलियन रही। इसमें डोमेस्टिक ऑर्डर इनफ्लो 18% बढ़ा, जो कंपनी की मजबूत घरेलू मांग को दर्शाता है।
वैल्युएशन और भविष्य की राह
L&T का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹5.88 ट्रिलियन है। कंपनी का P/E रेशियो (Price-to-Earnings Ratio) लगभग 34.4x से 41.0x के बीच चल रहा है, जो भारतीय कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के औसत P/E 15.4x से काफी ज्यादा है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी की क्वालिटी और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए यह वैल्युएशन उचित है।
चिंताएं और आगे का रास्ता
मिडिल ईस्ट पर कंपनी की 75% निर्भरता एक बड़ा जोखिम है। वहां की अस्थिरता प्रोजेक्ट्स में देरी और लागत बढ़ने का कारण बन सकती है। L&T के पास कुल ₹5.12 ट्रिलियन का बड़ा ऑर्डर बुक है, लेकिन मिडिल ईस्ट में संभावित बाधाओं से मार्जिन पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, कंपनी पर लगभग ₹1.44 ट्रिलियन की आकस्मिक देनदारियां (Contingent Liabilities) भी हैं, जिन पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
विश्लेषकों का भरोसा बरकरार
निकट अवधि की चुनौतियों के बावजूद, ज्यादातर विश्लेषक L&T के भविष्य को लेकर सकारात्मक हैं। पिछले तीन महीनों में 6 में से 6 विश्लेषकों ने 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) की रेटिंग दी है। उनका औसत 12 महीने का प्राइस टारगेट लगभग ₹4,785.83 है, जो मौजूदा स्तरों से करीब 11.86% की बढ़ोतरी का संकेत देता है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी जोर, डिफेंस और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में विकास और मजबूत डोमेस्टिक ऑर्डर पाइपलाइन को देखते हुए, विश्लेषक मानते हैं कि यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का एक अच्छा मौका हो सकती है।