JSW Steel का सबसे बड़ा ऑर्डर और L&T की परफॉरमेंस
JSW Steel के विस्तार की बड़ी योजना में L&T का अहम योगदान होगा। JSW Steel का लक्ष्य 2031 तक अपनी क्रूड स्टील क्षमता को 50 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) से अधिक बढ़ाना है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए, L&T अपनी मिनरल्स एंड मेटल्स (M&M) वर्टिकल के ज़रिए इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और इंस्टॉलेशन का काम संभालेगी। इसमें JSW के बेल्लारी और पारादीप साइट्स पर ब्लास्ट फर्नेस और स्टील मेल्ट शॉप्स जैसी महत्वपूर्ण फैसिलिटीज शामिल हैं। यह L&T के लिए घरेलू मेटल सेक्टर का अब तक का सबसे बड़ा सिंगल ऑर्डर है।
नतीजों का असर और रिकॉर्ड ऑर्डर बुक
हालांकि, इस बड़ी डील के बावजूद, मार्केट की नज़रें L&T के Q4 FY26 के फाइनैंशियल नतीजों पर टिकी रहीं। कंपनी के कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 3% की गिरावट आई और यह ₹5,326 करोड़ पर आ गया। इस गिरावट का एक मुख्य कारण पिछले साल की समान अवधि में मिला ₹475 करोड़ का एक्सेप्शनल गेन था। दूसरी ओर, कंपनी के रेवेन्यू ने दमदार परफॉरमेंस दिखाई, जो 11% बढ़कर ₹82,762 करोड़ हो गया। EBITDA में भी 5% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹8,610 करोड़ रहा।
इस बीच, इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन दिग्गज L&T के ऑर्डर बुक ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। 31 मार्च 2026 तक, कंपनी का कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक ₹7.40 लाख करोड़ यानी ₹7,40,327 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 28% ज्यादा है। इसमें से 52% ऑर्डर अंतरराष्ट्रीय बाजार से आए हैं, जो कंपनी की ग्लोबल पकड़ को दर्शाते हैं।
सेक्टर का नज़रिया और संभावित जोखिम
JSW Steel के साथ हुआ यह बड़ा सौदा भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और मेटल सेक्टर की मज़बूती को दिखाता है। अनुमान है कि सरकारी नीतियों और प्राइवेट निवेश से भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर मार्केट 2031 तक 8% सालाना की दर से बढ़कर USD 302.62 बिलियन तक पहुंच जाएगा। इसी तरह, स्टील की खपत भी इंफ्रा, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन की डिमांड के चलते 7-9% सालाना बढ़ने की उम्मीद है।
मज़बूत ऑर्डर बुक और स्ट्रेटेजिक जीत के बावजूद, कुछ जोखिम अभी भी बने हुए हैं। मैनेजमेंट ने चेतावनी दी है कि FY27 में महंगाई (Inflation) मार्जिन को प्रभावित कर सकती है। सप्लाई चेन में आई दिक्कतों के चलते Q4 FY26 में कंपनी को ₹5,000 करोड़ का रेवेन्यू शॉर्टफॉल भी झेलना पड़ा। भले ही L&T ने अपने 'लक्ष्य 26' प्लान के तहत रेवेन्यू और ऑर्डर इनफ्लो के लक्ष्य पूरे कर लिए हों, लेकिन FY26 का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 16.6% रहा, जो 18% के लक्ष्य से कम है। Siemens, GE, और Shapoorji Pallonji जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा भी एक चुनौती है। वेस्ट एशिया जैसे क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) भी भविष्य में प्रोजेक्ट्स और इनपुट कॉस्ट को प्रभावित कर सकते हैं।
