Larsen & Toubro ने रेयर-अर्थ मैग्नेट बनाने के सरकारी इंसेंटिव प्रोग्राम के लिए बोली लगाई है। कंपनी का लक्ष्य **6,000 मीट्रिक टन** की सालाना क्षमता तैयार करना है, ताकि इलेक्ट्रिक व्हीकल और विंड एनर्जी सेक्टर के लिए स्थानीय सप्लाई चेन बनाई जा सके और चीन की **90%** हिस्सेदारी को चुनौती दी जा सके।
Larsen & Toubro ने अब अपने कारोबार का विस्तार करते हुए रेयर-अर्थ मैग्नेट के क्षेत्र में कदम रखा है। कंपनी ने सरकारी इंसेंटिव प्रोग्राम के लिए ₹7,280 करोड़ की बोली लगाई है। यह कदम कंपनी के पारंपरिक निर्माण और इंजीनियरिंग जड़ों से हटकर भविष्य की तकनीक यानी हाई-प्रिसिजन कंपोनेंट्स बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में मजबूती
रेयर-अर्थ मैग्नेट इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, विंड टर्बाइन और इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स के मोटर्स में अहम भूमिका निभाते हैं। वर्तमान में चीन का ग्लोबल प्रोडक्शन में लगभग 90% कब्जा है। L&T की यह रणनीति वर्टिकल इंटीग्रेशन का हिस्सा है। कंपनी पहले से ही इजरायल की EVR Motors के साथ ट्रैक्शन मोटर्स विकसित कर रही है। अब खुद मैग्नेट बनाने से कंपनी सिस्टम इंटीग्रेटर से हटकर सीधे कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर बन जाएगी।
कड़ी प्रतिस्पर्धा और जोखिम
इस इंसेंटिव प्रोग्राम के लिए L&T के साथ 15 अन्य कंपनियां भी मैदान में हैं, जिनमें जापान की Proterial Ltd. जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि इस क्षेत्र में उतरना आसान नहीं है। इसमें भारी-भरकम निवेश और एडवांस्ड तकनीक की जरूरत है।
चीन के स्थापित मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और कम लागत के सामने टिके रहना एक लंबी चुनौती होगी। कंपनी को न केवल तकनीकी साझेदारी सुनिश्चित करनी होगी, बल्कि कॉस्ट-कॉम्पिटिटिव प्रोडक्शन भी बनाए रखना होगा। अब निवेशकों की नजरें बिडिंग के नतीजे पर टिकी हैं, जिसके बाद ही प्रोजेक्ट की लागत और टाइमलाइन स्पष्ट हो पाएगी।
