भू-राजनीतिक तनावों से बढ़ी उपकरणों की मांग, सप्लाई की समस्याएँ भी आईं सामने
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों का असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट्स और भारत में ग्राहकों के व्यवहार पर दिख रहा है। एलपीजी (LPG) सप्लाई में रुकावट के डर ने इंडक्शन कुकटॉप को लाखों लोगों के लिए सुविधा से एक अर्जेंट ज़रूरत बना दिया है। मार्च 2026 में, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर इनकी बिक्री सामान्य वॉल्यूम से 30 गुना तक बढ़ गई। दूसरे इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग में भी उछाल देखा गया। रिटेलर्स ने ग्राहकों को एहतियातन एक से ज़्यादा यूनिट खरीदते हुए देखा। मांग में इस अचानक उछाल ने, भले ही बिक्री बढ़ाई हो, लेकिन देश की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन की तैयारियों की सीमाओं को साफ तौर पर दिखाया है।
एलपीजी के डर से अचानक बढ़ी मांग
इस भारी मांग की मुख्य वजह एलपीजी सप्लाई को लेकर पैदा हुआ कथित खतरा था, जिसका इस्तेमाल भारत के लगभग 87% घरों में होता है। जैसे-जैसे तनाव बढ़ा, शिपिंग में रुकावट और कीमतों में बढ़ोतरी के डर ने ग्राहकों को तेज़ी से विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया। इंडक्शन कुकटॉप, जो 85-90% तक ऊर्जा-कुशल (energy-efficient) होते हैं और गैस स्टोव से तेज़ खाना पकाते हैं, पहली पसंद बन गए। इस दौड़ ने उत्पादन क्षमता पर ज़बरदस्त दबाव डाला है, जिसके चलते हर जगह 'सोल्ड आउट' के बोर्ड लगे दिख रहे हैं। कमर्शियल ग्राहक जैसे रेस्टोरेंट भी एलपीजी की तंग सप्लाई से जूझ रहे हैं और इलेक्ट्रिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
मार्केट ग्रोथ और पुर्जों पर निर्भरता
यह मांग का उछाल ऐसे समय में आया है जब भारत का पावर ग्रिड सुधर रहा है और सरकार इलेक्ट्रिक कुकिंग को बढ़ावा दे रही है। बिजली की कमी में कमी आने से 2.8 करोड़ से ज़्यादा नए घरों में अब भरोसेमंद बिजली पहुंच रही है, जिससे ज़्यादा लोगों के लिए इलेक्ट्रिक कुकिंग व्यावहारिक हो गई है। भारतीय इंडक्शन कुकटॉप मार्केट का अनुमानित मूल्यांकन 2026 में 842 मिलियन अमेरिकी डॉलर था और 2032 तक यह सालाना 10.35% से ज़्यादा की दर से बढ़ने की उम्मीद है। Prestige, Philips, Bajaj, Pigeon और Havells जैसे बड़े ब्रांड मार्केट में हावी हैं, जिनका मार्केट शेयर लगभग 65% है। हालांकि, मांग में इस अचानक उछाल ने मुख्य रूप से चीन से आने वाले आयातित पुर्जों, खासकर क्रिस्टलाइन ग्लास और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स पर भारी निर्भरता को उजागर किया है। इससे डिलीवरी का समय बढ़ गया है और सप्लाई चेन की कमजोरियां सामने आई हैं, जो असली घरेलू विनिर्माण आत्मनिर्भरता और लचीलेपन के लिए एक चुनौती पेश करती हैं।
अंदरूनी जोखिम और विश्लेषकों की सतर्कता
हालांकि, अचानक बढ़ी हुई मांग उपकरण निर्माताओं के लिए अच्छी दिख रही है, लेकिन इसमें बड़े जोखिम भी छिपे हैं। भारतीय कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर (consumer durables sector) में साल-दर-साल 17% की गिरावट देखी गई है, जो बताता है कि यह इंडक्शन कुकटॉप बूम एक मुश्किल बाज़ार में असामान्य हो सकता है। इलेक्ट्रिक कुकिंग की लंबी अवधि की सफलता भरोसेमंद बिजली पर भी निर्भर करती है, जो अभी भी कई ग्रामीण इलाकों में बार-बार बिजली कटौती (outages) की समस्या के कारण एक चुनौती है। ऐसे में, कई घर बैकअप के तौर पर गैस का इस्तेमाल जारी रखेंगे। विश्लेषक इस स्थिति को लेकर सतर्क हैं; कुछ ने Dixon Technologies जैसी कंपनियों के लिए विकास और मुनाफे की उम्मीदों में बदलाव के कारण प्राइस टारगेट (price targets) भी कम किए हैं। चीनी कंपोनेंट्स पर भारी निर्भरता सप्लाई चेन में समस्याएं पैदा करती है और लागत कम करने के प्रयासों में बाधा डालती है।
सरकारी पहल और दीर्घकालिक संभावनाएँ
सरकार घरेलू निर्माताओं पर इंडक्शन कुकटॉप का उत्पादन बढ़ाने के लिए ज़ोर दे रही है, क्योंकि इसे एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें संभावित पॉलिसी सपोर्ट, स्थानीय कंपोनेंट सप्लायर्स के लिए इंसेंटिव और महत्वपूर्ण पुर्जों के लिए आसान अल्पकालिक आयात नियमों (import rules) जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। भारतीय होम अप्लायंसेज मार्केट का अनुमान 2035 तक 143.04 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का है। सरकारी प्रचार और बेहतर बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते इंडक्शन कुकटॉप को एक प्रमुख ग्रोथ एरिया के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस बदलाव को टिकाऊ बनाने के लिए विनिर्माण क्षमता बढ़ाना, कंपोनेंट स्रोतों में विविधता लाना और देशभर में भरोसेमंद बिजली सुनिश्चित करना ज़रूरी होगा।