Kusumgar Narula के शेयर आज शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुए और लिस्टिंग पर ही निवेशकों को **37%** का बंपर मुनाफा हुआ। शेयर ₹419 के IPO प्राइस से बढ़कर ₹574 पर लिस्ट हुए और फिर **₹617.75** तक पहुंच गए। इस ₹650 करोड़ के IPO को **128.85** गुना सब्सक्रिप्शन मिला था, जो स्पेशलिटी फैब्रिक बनाने वाली इस कंपनी की जबरदस्त डिमांड को दिखाता है।
शेयर बाजार में शानदार शुरुआत
स्पेशलिटी इंजीनियर्ड फैब्रिक्स बनाने वाली कंपनी Kusumgar Narula Ltd. के शेयरों ने आज BSE पर अपने पहले ही दिन दमदार प्रदर्शन किया। स्टॉक ₹419 के IPO प्राइस के मुकाबले 574 पर खुला, जो 37% की प्रीमियम लिस्टिंग थी। ट्रेडिंग के दौरान यह 617.75 के उच्च स्तर तक पहुंच गया, जिससे IPO में शेयर पाने वाले निवेशकों को कुल 47.4% का लाभ हुआ। इस शानदार डेब्यू के साथ कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹6,466 करोड़ हो गया।
IPO में निवेशकों का जबरदस्त उत्साह
यह मजबूत शुरुआत 10 जुलाई 2026 को समाप्त हुए सफल IPO के बाद हुई है। ₹650 करोड़ के इस ऑफर को निवेशकों से बंपर रिस्पांस मिला था, जिसमें कुल 128.85 गुना ज्यादा बिड लगाई गई। इंस्टीट्यूशनल और नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों ने क्रमशः 284.10 और 165.46 गुना तक सब्सक्रिप्शन दिखाया, जबकि रिटेल निवेशकों ने भी 26.47 गुना तक रुचि दिखाई।
कंपनी का बिजनेस और वित्तीय स्थिति
1990 में स्थापित यह कंपनी टेक्निकल टेक्सटाइल सेगमेंट में काम करती है और बुने हुए, कोटेड और लेमिनेटेड फैब्रिक्स बनाती है। इनका इस्तेमाल डिफेंस, एयरोस्पेस और ऑटोमोटिव जैसे खास क्षेत्रों में होता है। कंपनी ने मार्च 2026 में समाप्त फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹711.8 करोड़ का कुल इनकम और ₹98.2 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। हालांकि, पिछले साल की तुलना में यह मामूली गिरावट है, पर कंपनी ने अपने कर्ज को घटाकर ₹223.6 करोड़ और नेट वर्थ को बढ़ाकर ₹503 करोड़ कर लिया है।
कंपनी के 1,000 से ज्यादा प्रोडक्ट्स का डाइवर्स पोर्टफोलियो इसकी ग्रोथ स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा है। लिस्टिंग से पहले, कंपनी ने Goldman Sachs, Blackstone Global Funds और SBI Contra Fund जैसे बड़े निवेशकों से ₹193.9 करोड़ जुटाए थे।
आगे क्या देखें?
अब सेकेंडरी मार्केट में निवेशकों की नजर सब्सक्रिप्शन के उत्साह से हटकर कंपनी के ऑपरेशनल परफॉर्मेंस पर होगी। टेक्निकल टेक्सटाइल सेक्टर में क्वालिटी बनाए रखने और खास स्टैंडर्ड्स को पूरा करने के लिए भारी कैपिटल खर्च की जरूरत होती है। ऐसे में, कंपनी की अपनी बची हुई कर्ज को मैनेज करने और प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। निवेशक यह भी देखेंगे कि कंपनी कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बनाए रखती है। आने वाली तिमाही नतीजों की घोषणाएं और एयरोस्पेस या डिफेंस सेक्टर में नए सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स के अपडेट कंपनी की लॉन्ग-टर्म अर्निंग ग्रोथ के संकेत देंगे।
