जापान की Kurita Water Industries और Membrane Group India ने मिलकर 'Kurita Membrane India' नाम से एक जॉइंट वेंचर (JV) शुरू किया है। यह नई कंपनी भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री के लिए खास वॉटर ट्रीटमेंट सॉल्यूशंस (Water Treatment Solutions) मुहैया कराएगी। इस साझेदारी का मकसद चिप बनाने के लिए जरूरी हाई-ग्रेड वॉटर सिस्टम की सप्लाई सुनिश्चित करना है।
क्या है ये नया वेंचर?
जापान की दिग्गज कंपनी Kurita Water Industries और भारत की Membrane Group India ने मिलकर 'Kurita Membrane India' नाम से एक नया जॉइंट वेंचर (JV) लॉन्च किया है। इस नई इकाई का मुख्य फोकस भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज के लिए एडवांस्ड वॉटर और वेस्टवाटर ट्रीटमेंट सॉल्यूशंस (Advanced Water and Wastewater Treatment Solutions) प्रदान करना होगा। इस पार्टनरशिप में Kurita का इंटरनेशनल वॉटर मैनेजमेंट का अनुभव और Membrane Group की लोकल मैन्युफैक्चरिंग व प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की क्षमताएं शामिल होंगी। कंपनी एक अल्ट्राप्योर वॉटर एनालिसिस सेंटर (Ultrapure Water Analysis Centre) भी स्थापित करने की योजना बना रही है, जो फैब्रिकेशन प्लांट्स के लिए क्वालिटी टेस्टिंग और प्रोसेस ऑप्टिमाइजेशन (Process Optimization) पर काम करेगा।
चिप मैन्युफैक्चरिंग में पानी का महत्व
सेमीकंडक्टर बनाने की प्रक्रिया में पानी की भारी खपत होती है। एक सिंगल फैब्रिकेशन प्लांट (Fab) को हर दिन लाखों गैलन पानी की जरूरत पड़ती है, जिसका इस्तेमाल सिलिकॉन वेफर्स (Silicon Wafers) को साफ करने और मशीनों को ठंडा रखने के लिए होता है। इस पानी को 'अल्ट्राप्योर वॉटर' (Ultrapure Water) के स्तर तक शुद्ध करना पड़ता है, ताकि जरा सी भी गंदगी चिप्स के नाजुक सर्किट को नुकसान न पहुंचा सके। जरा सी अशुद्धि भी चिप्स की पूरी खेप को बेकार कर सकती है। इस खास क्षेत्र पर फोकस करके, यह नया वेंचर खुद को सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन (Semiconductor Supply Chain) का एक अहम हिस्सा बना रहा है। यह उस इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) को मुहैया कराने का क्लासिक उदाहरण है, जो भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करने वाले मुख्य खिलाड़ियों का समर्थन करता है।
ऑपरेशनल और रेगुलेटरी जोखिम
भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिल रहा है, लेकिन पानी की भारी खपत वाली इस इंडस्ट्री में बड़े ऑपरेशनल और पर्यावरणीय जोखिम भी हैं। भारत के कई औद्योगिक क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता एक बड़ी चिंता का विषय है। इस क्षेत्र में काम करने वाली किसी भी कंपनी को पानी की खपत और डिस्चार्ज (Discharge) को लेकर सख्त पर्यावरणीय नियमों का सामना करना पड़ता है। अक्सर इंडस्ट्रियल फैसिलिटीज को अपने लगभग सारे वेस्टवाटर को रीसायकल (Recycle) करने के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) सिस्टम लागू करने की आवश्यकता होती है। अगर टेक्नोलॉजी या इंफ्रास्ट्रक्चर इन कड़े पर्यावरणीय मानकों को पूरा नहीं कर पाते हैं, तो यह नियामक बाधाओं (Regulatory Hurdles), जुर्माने या उन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स के लिए ऑपरेशनल देरी का कारण बन सकता है, जिनकी वे सेवा करते हैं। निवेशकों को यह समझना होगा कि इस बिजनेस मॉडल की सफलता लगातार उच्च-गुणवत्ता वाले पानी के आउटपुट को बनाए रखने और बदलते पर्यावरण नियमों का पालन करने की क्षमता पर बहुत अधिक निर्भर करती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर दांव
भारत की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की बड़ी योजनाएं बड़े फैब्रिकेशन और असेंबली प्रोजेक्ट्स के सफल कार्यान्वयन पर टिकी हैं। इन प्रोजेक्ट्स में न केवल प्लांट्स पर, बल्कि भरोसेमंद बिजली, हाई-ग्रेड केमिकल्स और एडवांस्ड वॉटर ट्रीटमेंट जैसी सहायक यूटिलिटीज (Utilities) पर भी भारी पूंजी खर्च की आवश्यकता होती है। Kurita Membrane India जैसे विशेष खिलाड़ी का प्रवेश बताता है कि इंडस्ट्री हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग की विशिष्ट यूटिलिटी मांगों के लिए तैयारी कर रही है। इस जॉइंट वेंचर की व्यावसायिक सफलता संभवतः सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स की घोषणा से वास्तविक उत्पादन तक की गति से जुड़ी होगी।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम (Semiconductor Ecosystem) को ट्रैक करने वाले लोगों के लिए, मुख्य ध्यान सेमीकंडक्टर फैब निर्माण की समय-सीमा और यूटिलिटी कॉन्ट्रैक्ट्स (Utility Contracts) के अवार्ड पर रहेगा। निवेशक इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि यह जॉइंट वेंचर भारत में काम कर रहे प्रमुख सेमीकंडक्टर खिलाड़ियों से कितनी जल्दी प्रोजेक्ट्स हासिल करता है। इसके अतिरिक्त, वेंचर की उच्च ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स बनाए रखने और सरकार द्वारा अनिवार्य जल पुनर्चक्रण (Water Recycling) मानदंडों को पूरा करने की क्षमता को ट्रैक करना भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इसमें कोई भी विफलता उन फैक्ट्रियों के उत्पादन अपटाइम (Production Uptime) को प्रभावित कर सकती है जिनकी वे सेवा करते हैं।
