नतीजों का लेखा-जोखा
Kuantum Papers Limited के Q3 FY26 के नतीजों से पता चलता है कि कंपनी ऑपरेशनल सुधार और विस्तार पर पूरा ध्यान दे रही है। इस तिमाही में कंपनी का ऑपरेशनल इनकम ₹290 करोड़ रहा, जो पिछले क्वार्टर के मुकाबले 4% ज्यादा है। प्रोडक्शन वॉल्यूम में 1,701 टन की बढ़ोतरी ने इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई। कॉस्ट पर टन लगभग स्थिर रहा, जो मार्जिन कंट्रोल के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
मुनाफे में भी बड़ी उछाल देखने को मिली। EBITDA पिछले क्वार्टर से 14% बढ़कर ₹39 करोड़ पर पहुंच गया, और EBITDA मार्जिन 125 बेसिस पॉइंट सुधरकर 13.55% हो गया। PAT (Profit After Tax) ₹10 करोड़ रहा, जिसमें 131 बेसिस पॉइंट का सुधार आया और यह 3.38% पर पहुंच गया। पेपर की कीमतों में भी लगभग ₹850 प्रति टन का मामूली इजाफा देखा गया, जिसने रेवेन्यू बढ़ाने में मदद की।
भविष्य की रणनीति और उम्मीदें
कंपनी मैनेजमेंट का मानना है कि इंडस्ट्री में जल्द ही सुधार देखने को मिलेगा। यूनियन बजट 2026 में पल्प/वेस्ट पेपर पर ड्यूटी में छूट और लकड़ी की कीमतों में नरमी से लागत कम होने की उम्मीदें हैं। भारत-यूरोप फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी एक्सपोर्ट के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
ऑपरेशनल अपग्रेड्स और विस्तार:
- पेपर मशीन 1 (PM 1) का रीबिल्ड पूरा हो गया है, जिससे डेली कैपेसिटी बढ़कर 80 मीट्रिक टन हो गई है।
- Precipitated Calcium Carbonate (PCC) कैपेसिटी दोगुनी करके 50,000 टन प्रति वर्ष कर दी गई है।
- PM 4 (8,758 MT) और PM 1 (91.4 MT) पर दिसंबर 2025 में रिकॉर्ड प्रोडक्शन लेवल हासिल किए गए।
- नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए गए हैं: Kuantum Kopio (कॉपियर ब्रांड) और Kuantum Pura (जिसमें 65% अर्गो पल्प का इस्तेमाल होता है)।
- 'प्रोजेक्ट निर्माण' (इंडस्ट्री 4.0) पर काम चल रहा है, जिसमें एडवांस्ड प्रोसेस कंट्रोल शामिल किया जा रहा है।
- प्लांट यूटिलाइजेशन लगभग 100% पर है।
कंपनी ने बड़ी कैपिटल इन्वेस्टमेंट की योजना बनाई है: PM 2 अपग्रेड के लिए ₹45 करोड़ (फरवरी 2026, करीब 30 दिन का शटडाउन) और PM 3 अपग्रेड के लिए ₹140 करोड़ (मई 2026, करीब 45 दिन का शटडाउन)। यह सब ₹735 करोड़ के बड़े एक्सपेंशन प्लान का हिस्सा है।
फाइनेंशियल टारगेट्स:
कंपनी ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखे हैं: FY26 के लिए ₹1,100 करोड़ का टॉप लाइन और FY27 के लिए ₹1,800 करोड़ रेवेन्यू और ₹300 करोड़ EBITDA का एनुअलाइज्ड रन रेट। नॉर्मलाइज्ड EBITDA मार्जिन ₹15,000 से ₹17,000 प्रति टन के बीच रहने का अनुमान है, और अगले कुछ सालों में इसे 20-22% तक ले जाने की कोशिश रहेगी।
कर्ज और वित्तीय स्थिति
कंपनी के मुताबिक, सबसे ज्यादा कर्ज ₹750 करोड़ के पार नहीं जाएगा, जबकि वर्तमान लॉन्ग-टर्म डेट लगभग ₹600 करोड़ है। मैनेजमेंट को पूरा भरोसा है कि वे पर्याप्त नकदी उत्पन्न कर पाएंगे, जिससे कर्ज चुकाया जा सके और वर्किंग कैपिटल फैसिलिटी ₹100 करोड़ का सपोर्ट भी मिलेगा।
