Krystal Integrated Services के शेयर में आज **4%** की तेजी देखी गई। कंपनी ने एक कंसोर्टियम (consortium) के हिस्से के रूप में महाराष्ट्र सरकार से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और ड्रेनेज नेटवर्क के विकास के लिए **₹740 करोड़** का सरकारी कॉन्ट्रैक्ट जीता है। इस डील से कंपनी के ऑर्डर बुक में इजाफा हुआ है।
महाराष्ट्र सरकार से बड़ी सौगात
मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को Krystal Integrated Services के शेयरों में लगभग 4% की मजबूती देखने को मिली। इसकी वजह महाराष्ट्र सरकार से मिले दो अहम वर्क ऑर्डर हैं। कंपनी, 'LC Infra-Krystal Consortium' का हिस्सा बनकर, पुणे और नागपुर राजस्व डिवीजनों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और ड्रेनेज नेटवर्क के विकास के लिए ₹740.06 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने में सफल रही है।
Krystal का कितना हिस्सा?
इस कंसोर्टियम में Krystal की 40% हिस्सेदारी है, जिसका मतलब है कि इस कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू में कंपनी का हिस्सा लगभग ₹296 करोड़ है। यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) के आधार पर पूरा किया जाएगा। यानी, कंपनी डिजाइन, सामग्री की खरीद और इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी। यह प्रोजेक्ट 'स्वच्छ महाराष्ट्र मिशन 2.0' के तहत दो साल में पूरा होने की उम्मीद है।
नतीजों पर एक नजर
यह ऑर्डर जीत ऐसे समय में आई है जब कंपनी ने हाल ही में फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) की पहली तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं। जून 2026 को समाप्त तिमाही में, कंपनी का रेवेन्यू ₹360.71 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 11.65% अधिक है। इसी अवधि में नेट प्रॉफिट 6.30% बढ़कर ₹17.36 करोड़ हो गया।
मार्जिन पर चिंता?
हालांकि कंपनी ने रेवेन्यू में लगातार बढ़ोतरी दिखाई है, लेकिन निवेशकों की पैनी नजर इसके प्रॉफिट मार्जिन पर बनी हुई है। FY27 की पहली तिमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 6.32% था, जो पिछले साल की समान तिमाही के 6.61% की तुलना में थोड़ा कम है। यह गिरावट इस ओर इशारा करती है कि कंपनी भले ही ज्यादा बिजनेस जीत रही हो, लेकिन इनपुट लागत या अन्य ऑपरेशनल खर्चों में बढ़ोतरी मुनाफे पर दबाव डाल रही है।
आगे क्या?
इतने बड़े सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए समय पर एग्जीक्यूशन (execution) एक अहम फैक्टर है। जैसे-जैसे कंपनी अपने ऑपरेशंस का विस्तार कर रही है, उसे वर्किंग कैपिटल का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करना होगा ताकि प्रोजेक्ट पूरे होने में लगने वाले समय के कारण कैश फ्लो पर दबाव न पड़े। आने वाली तिमाहियों में शेयरधारकों का मुख्य ध्यान प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की गति और इन बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स को मैनेज करते हुए मार्जिन सुधारने की कंपनी की क्षमता पर रहेगा।
