Kothari Industrial Corporation को अपने KOAIR-10L हेक्साकॉप्टर के लिए DGCA से आधिकारिक 'Type Certification' मिल गया है। इस मंजूरी के बाद कंपनी अब कृषि उपयोग के लिए अपने ड्रोन के बड़े पैमाने पर उत्पादन और बिक्री शुरू करने के लिए तैयार है।
रेगुलेटरी मंजूरी और नया सफर
Kothari Industrial Corporation ने 'Drone Rules 2021' के तहत DGCA से टाइप सर्टिफिकेशन हासिल कर लिया है। इसका मतलब है कि कंपनी का KOAIR-10L ड्रोन अब भारत में कमर्शियल उड़ान और कृषि कार्यों के लिए पूरी तरह से फिट है। कंपनी अब अपनी टेस्टिंग फेज से निकलकर फुल-स्केल मैन्युफैक्चरिंग की तैयारी कर रही है।
क्या है KOAIR-10L की खासियत?
यह एक मीडियम-क्लास ड्रोन है जिसे खास तौर पर प्रिसिजन फार्मिंग के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें 10-लीटर की टंकी और स्पेशल नोजल्स लगे हैं, जो कीटनाशकों और उर्वरकों के छिड़काव को आसान और सटीक बनाते हैं। यह न केवल मेहनत कम करेगा बल्कि केमिकल की बर्बादी को भी रोकेगा।
निवेशकों के लिए संकेत
टेक्सटाइल और फर्टिलाइजर सेक्टर की पुरानी कंपनी होने के नाते, यह ड्रोन मार्केट में उतरना Kothari Industrial के लिए एक बड़ा 'स्ट्रैटेजिक पिवट' है। सरकार भी 'Drone Shakti' प्रोग्राम के जरिए ड्रोन तकनीक को बढ़ावा दे रही है।
चुनौती और मार्केट कॉम्पिटिशन
हालाँकि, भारत में ड्रोन का मार्केट काफी कॉम्पिटिटिव हो चुका है। ideaForge जैसी दिग्गज कंपनियां पहले से ही मैदान में हैं। कंपनी की कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि वह किसानों को कैसा आफ्टर-सेल्स सपोर्ट देती है। अगर सर्विस नेटवर्क मजबूत नहीं हुआ, तो तकनीकी दिक्कतों के चलते किसानों का भरोसा जीतना मुश्किल हो सकता है।
अब निवेशकों की नजरें कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, सरकारी ऑर्डर और कृषि सहकारी समितियों के साथ होने वाली डील्स पर रहेंगी। क्या पुरानी इंडस्ट्रियल कंपनी हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में अपनी जगह बना पाएगी? यह आने वाली तिमाहियों में पता चलेगा।
