भारत में कोरियन कंपनियों का बढ़ता दखल
Samsung Electronics, LG Group, और Hyundai Motor जैसी दक्षिण कोरिया की बड़ी कंपनियों के टॉप एग्जीक्यूटिव्स की हाल ही में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अहम बैठक हुई। इस मुलाकात से यह संकेत मिला है कि ये कंपनियां भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने और निर्यात बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठाने वाली हैं। यह भारत के बढ़ते बाजार और वैश्विक सप्लाई चेन में इसकी बदलती भूमिका को दर्शाता है। ये कंपनियां भारत की विशाल उपभोक्ता आधार और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का लाभ उठाना चाहती हैं।
EV और चिप्स पर खास फोकस
बैठक में ग्रोथ वाले सेक्टरों पर खास तौर पर बात हुई। SK Hynix भारत में मेमोरी चिप असेंबली और टेस्टिंग प्लांट लगाने की संभावना तलाश रही है, जो 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देगा। LG Group केमिकल और एडवांस्ड डिस्प्ले मॉड्यूल जैसे नए क्षेत्रों में निवेश पर विचार कर रहा है। वहीं, Hyundai Motor ने भारत के TVS Motor Company के साथ मिलकर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सॉल्यूशंस विकसित करने और प्रोडक्शन के लिए पार्टनरशिप की घोषणा की है। भारत का EV सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके 2032 तक $17.88 अरब तक पहुंचने का अनुमान है।
व्यापारिक साझेदारी को मजबूती
प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने और AI व सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में और निवेश को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। दोनों देश 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान $27 अरब से दोगुना कर $50 अरब तक ले जाने का लक्ष्य रखते हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 'कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA)' को अपग्रेड करने की योजना है। भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर के लिए 'प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI)' जैसी योजनाओं के माध्यम से इस ग्रोथ को बढ़ावा दे रही है।
कोरियन कंपनियों के सामने चुनौतियां
हालांकि, भारत में काम करते हुए कोरियन कंपनियों को कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा। अस्थिर बिजली आपूर्ति और सड़क की खराब गुणवत्ता जैसी समस्याएं, जो सेमीकंडक्टर कंपनियों के लिए चिंता का विषय रही हैं, अभी भी बनी रह सकती हैं। भारत सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव और सुधार कर रहा है, लेकिन उच्च लागत और लंबे समय में रिटर्न के कारण मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा निवेश आकर्षित करना एक चुनौती है। इसके अलावा, कोरियन कंपनियों को चीन और भारत की घरेलू कंपनियों से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
भविष्य की उम्मीद: आपसी विकास
कोरियन कंपनियों का बढ़ता ध्यान एक रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। वे अपनी वैश्विक सप्लाई चेन को फैलाने के लिए भारत के बड़े बाजार और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का इस्तेमाल कर रहे हैं। AI, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज में व्यापार और सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों पक्ष प्रतिबद्ध हैं। यह साझेदारी भारत को मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में मजबूत करने में मदद करेगी, जिससे एक मजबूत आर्थिक रिश्ता बनेगा।
