Korea Marine Equipment Association (KOMEA) ने मुंबई में अपना पहला ऑफिस खोल दिया है। इसका उद्देश्य भारतीय शिपयार्ड्स को जरूरी मरीन कंपोनेंट्स लोकल लेवल पर मैन्युफैक्चर करने में मदद करना है। भारत सरकार के **$7.8 बिलियन** के सपोर्ट पैकेज के बाद अब देश में **400** से ज्यादा जहाजों का ऑर्डर पाइपलाइन में है, जिसे पूरा करने के लिए यह साझेदारी गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
कोरियाई तकनीक का मिलेगा साथ
KOMEA ने भारत में कदम रखते हुए अपनी 304 कंपनियों की ताकत को भारतीय बाजार से जोड़ने का प्लान बनाया है। इसमें HD Hyundai, Hanwha Ocean और Samsung Heavy Industries जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं। अब नेविगेशन टेक्नोलॉजी, प्रोपल्शन सिस्टम और डेक मशीनरी जैसे क्रिटिकल पार्ट्स भारत में ही बनेंगे, जिससे इम्पोर्ट पर निर्भरता कम होगी।
शिपिंग सेक्टर में जोरदार उछाल
सितंबर 2025 में सरकार द्वारा लॉन्च किए गए $7.8 बिलियन के सपोर्ट पैकेज का असर साफ दिख रहा है। साल 2025 में आउटपुट में 40% की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जो 2026 में बढ़कर 80% के पार पहुंच गई। इस समय भारतीय शिपयार्ड्स के पास लगभग $23 बिलियन मूल्य के 400 से ज्यादा जहाजों के ऑर्डर हैं।
सरकार की क्या है योजना?
केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल का मानना है कि कोरियाई विशेषज्ञता मिलने से स्थानीय शिपयार्ड्स का आधुनिकीकरण तेजी से होगा। हालांकि, चुनौती यह है कि भारतीय कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी में भारी निवेश करना होगा ताकि वे ग्लोबल सप्लायर्स को टक्कर दे सकें। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग से शिपयार्ड्स के प्रॉफिट मार्जिन में कितना सुधार होता है।
