Kobelco Construction Equipment India ने इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की मांग को भुनाने के लिए तीन नए एक्सावेटर मॉडल लॉन्च किए हैं। कंपनी अपने प्रोडक्शन में लोकल मैन्युफैक्चरिंग को **68%** तक बढ़ाकर दक्षता सुधारने और **₹2,500 करोड़** के रेवेन्यू का लक्ष्य हासिल करने की तैयारी में है।
बाजार विस्तार और नई रणनीति
Kobelco Construction Equipment India (KCEI) ने भारतीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए 19.1 से 24 टन की कैटेगरी में तीन नए मॉडल उतारे हैं। कंपनी का अनुमान है कि घरेलू हाइड्रोलिक एक्सावेटर बाजार इस साल 31,000 यूनिट्स से बढ़कर 33,000 यूनिट्स तक पहुंच सकता है। हालांकि नेशनल हाईवे अथॉरिटी के प्रोजेक्ट्स में सुस्ती है, लेकिन सिंचाई और रूरल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों से मांग में तेजी बनी हुई है।
श्री सिटी प्लांट पर फोकस
कंपनी के आंध्र प्रदेश स्थित श्री सिटी प्लांट में अब तक ₹900 करोड़ का निवेश किया जा चुका है। फिलहाल यहां सालाना 2,800-2,900 यूनिट्स का उत्पादन होता है, जिसे अगले दो सालों में 3,500 यूनिट्स तक ले जाने की योजना है।
लोकलाइजेशन का फायदा
Kobelco ने अपने लोकल कंटेंट को 48% से बढ़ाकर 68% कर दिया है। इसकी मुख्य वजह जापानी Hino इंजन के बजाय Cummins के स्थानीय इंजनों का इस्तेमाल करना है। इससे न केवल लागत में कमी आई है, बल्कि सप्लाई चेन भी अधिक स्थिर हुई है। पिछले साल कंपनी का रेवेन्यू ₹2,000 करोड़ था, जिसे अब बढ़ाकर ₹2,500 करोड़ करने का टारगेट रखा गया है।
प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां
भारतीय बाजार में चीनी कंपनियों का मार्केट शेयर फिलहाल 33-34% है, जो पहले 40% के करीब हुआ करता था। Kobelco अब महाराष्ट्र और झारखंड जैसे हाई-ग्रोथ राज्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी भू-राजनीतिक अस्थिरता और शिपिंग बाधाओं जैसे बाहरी जोखिमों पर भी नजर रखे हुए है, क्योंकि कंपनी के कुल वॉल्यूम का एक-तिहाई हिस्सा एक्सपोर्ट से आता है।
