Khurja Pottery: यूपी की ODOP स्कीम से बदली तस्वीर, अब ग्लोबल मार्केट में दिखेगा दम

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AuthorAditya Rao|Published at:
Khurja Pottery: यूपी की ODOP स्कीम से बदली तस्वीर, अब ग्लोबल मार्केट में दिखेगा दम

उत्तर प्रदेश का पारंपरिक Khurja Pottery हब अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। राज्य सरकार की ODOP स्कीम के जरिए स्थानीय मैन्युफैक्चरर्स अब आधुनिक गैस-आधारित भट्टियों और बेहतर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को अपना रहे हैं, जिससे एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस को बड़ा बूस्ट मिलेगा।

बुलंदशहर स्थित खुर्जा का सिरेमिक क्लस्टर अब कुटीर उद्योगों की पारंपरिक छवि को पीछे छोड़कर एक संगठित औद्योगिक मॉडल की ओर बढ़ रहा है। राज्य सरकार की 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' (ODOP) पहल के तहत इन स्थानीय इकाइयों को न केवल आर्थिक मदद मिल रही है, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बड़ा सुधार किया जा रहा है। सबसे बड़ा बदलाव डीजल और कोयले वाली पुरानी भट्टियों की जगह गैस-आधारित सिस्टम का आना है, जिससे प्रोडक्शन लागत घटेगी और उत्पादों की गुणवत्ता में एकरूपता आएगी।

मॉडर्नाइजेशन और एक्सपोर्ट की तैयारी

GI टैग प्राप्त खुर्जा क्लस्टर अब आधुनिक वर्कफ़्लो को अपना रहा है। सरकार द्वारा यूनिट्स को अपग्रेड करने के लिए दी जाने वाली सब्सिडी के अलावा, कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स और लेबोरेटरीज भी बनाई जा रही हैं। वहीं, India Exim Bank के सहयोग से 3D डिजाइन स्टूडियो भी विकसित किए जा रहे हैं, ताकि कारीगर पारंपरिक डिजाइन से हटकर ग्लोबल डिमांड के हिसाब से नए उत्पाद तैयार कर सकें। अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए सरकार द्वारा दी जा रही रीइम्बर्समेंट सुविधा से अब छोटी यूनिट्स भी विदेशों तक अपनी पहुंच बना रही हैं।

MSMEs के सामने स्केल करने की चुनौती

सरकारी सपोर्ट के बावजूद, छोटी इकाइयों के लिए एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में ढलना चुनौतीपूर्ण है। बड़े औद्योगिक सिरेमिक मैन्युफैक्चरर्स के मुकाबले, जहां ऑटोमेशन और इकोनॉमीज ऑफ स्केल का फायदा होता है, खुर्जा के MSMEs के सामने गैस पाइपलाइन जैसे नए इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च और क्वालिटी मेंटेन करना एक बड़ी परीक्षा है। लंबे समय में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये इकाइयां सरकारी सब्सिडी के सहारे रहने के बजाय खुद को कितना आत्मनिर्भर बना पाती हैं।

भविष्य की राह

यह बदलाव ग्रामीण उद्योगों के संगठित होने की एक बड़ी केस स्टडी है। अब फोकस रिजेक्शन रेट को कम करने और रॉ मटेरियल सप्लाई चेन को ऑप्टिमाइज करने पर है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 'खुर्जा' ब्रांड को एक प्रीमियम पहचान मिल सके। निवेशकों और इंडस्ट्री एनालिस्ट्स की नजर अब यहाँ के एक्सपोर्ट डेटा और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की सफलता पर है, जो इस क्लस्टर की कमर्शियल वायबिलिटी तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.