📈 रेवेन्यू की बहार, मुनाफे पर मार!
Kernex Microsystems (India) Limited ने दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही और नौ महीनों के लिए अपने वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने टॉप-लाइन पर तो कमाल दिखाया है, लेकिन बॉटम-लाइन और ऑडिटर की टिप्पणियों ने चिंता बढ़ा दी है।
आंकड़े क्या कहते हैं?
कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 97.23% की जबरदस्त उछाल आई है, जो ₹72.6 करोड़ (₹7,259.76 लाख) पर पहुंच गया। यह बढ़ोतरी पिछले साल के कम बेस के कारण भी संभव हुई। लेकिन, इसी दौरान कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 15.09% की गिरावट आई है और यह ₹6.1 करोड़ (₹7.1 करोड़ से घटकर ₹605.88 लाख) रह गया। इसी के चलते बेसिक और डाइल्यूटेड EPS भी ₹4.29 से गिरकर ₹3.61 हो गया।
नौ महीनों (9M FY26) की बात करें तो कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में 64.61% की बढ़ोतरी के साथ ₹175.6 करोड़ (₹17,564.43 लाख) का आंकड़ा छुआ, वहीं PAT में 14.12% की बढ़त देखी गई और यह ₹20 करोड़ (₹1,999.20 लाख) पर पहुंचा। इस अवधि में डाइल्यूटेड EPS बढ़कर ₹11.98 हो गया।
स्टैंडअलोन रेवेन्यू में भी 97.09% की उछाल दिखी, लेकिन स्टैंडअलोन PAT 13.29% गिरकर ₹619.41 लाख पर आ गया। नौ महीनों के स्टैंडअलोन PAT में 12.74% की बड़ी गिरावट आई, जिसे कंपनी ने बढ़े हुए डेफेर्रड टैक्स एक्सपेंस का नतीजा बताया है।
🚨 ऑडिटर की बड़ी चेतावनी!
इन नतीजों के बीच सबसे बड़ी चिंता की बात ऑडिटर की क्वालिफाइड ओपिनियन है। ऑडिटर ने स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर एक गंभीर खामी पाई है: कंपनी ने अपनी पूरी तरह से स्वामित्व वाली सब्सिडियरी Avant-Garde Infosystems, Inc. (AGI) में ₹12.76 करोड़ (₹1,275.97 लाख) के इन्वेस्टमेंट पर हुए इम्पेयरमेंट लॉस (घाटे) को मानने से इनकार कर दिया। इस चूक के कारण स्टैंडअलोन प्रॉफिट और अन्य कॉम्प्रीहेंसिव इनकम को ₹12.76 करोड़ से ज्यादा दिखाया गया है।
इसके अलावा, ऑडिटर ने कुछ और बातों पर निवेशकों का ध्यान दिलाया है:
- ₹422.73 लाख के ट्रेड रिसीवेबल्स तीन साल से भी ज्यादा समय से बकाया हैं, जिन पर ₹217.87 लाख का एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) प्रोविजन है।
- ₹265.03 लाख की बैंक गारंटी आर्बिट्रेशन/कंसिलिएशन की प्रक्रिया में फंसी हुई है।
- Kernex TCAS JV में इन्वेस्टमेंट और एडवांसेज के वैल्यू में आई कमी के लिए ₹392.34 लाख का प्रोविजन है, जहाँ नेट एसेट्स एडवांसेज से काफी कम थे।
कंपनी का मैनेजमेंट अभी भी मानता है कि ये एसेट्स रिकवर हो जाएंगे और इम्पेयरमेंट का मामला ग्रुप लेवल पर ठीक है।
⏳ ऑर्डर बुक और आगे का रास्ता
भविष्य की उम्मीद जगाने वाली बात यह है कि कंपनी के पास करीब ₹3,268 करोड़ (GST छोड़कर) का बड़ा ऑर्डर बुक है। इसमें ₹2,500 करोड़ के ऑर्डर Chittaranjan Locomotive Works (CLW) और Banaras Locomotive Works (BLW) से LOCO TCAS प्रोजेक्ट्स के हैं। यह ऑर्डर बुक वैल्यू कंपनी के पिछले बारह महीनों के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू का लगभग 12.6 गुना है।
हालांकि, मैनेजमेंट की ओर से भविष्य की कमाई या मुनाफे को लेकर कोई स्पष्ट गाइडेंस नहीं है, और ऑडिटर की चिंताओं के चलते कंपनी का भविष्य का आउटलुक थोड़ा अनिश्चित बना हुआ है। कंपनी का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह अपने बड़े ऑर्डर बुक को सफलतापूर्वक कैसे भुनाती है और ऑडिटर की गंभीर चिंताओं का समाधान कैसे करती है।
