ऑर्डर बुक बढ़ी, पर परफॉरमेंस में कहां कमी?
Kaynes Technology ने तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में अपने ऑर्डर बुक को 50% साल-दर-साल (YoY) बढ़ाकर लगभग ₹9,172 करोड़ कर लिया है। यह मजबूत बुक-टू-बिल रेशियो (Book-to-Bill Ratio) 2.7x के साथ भविष्य के लिए अच्छी रेवेन्यू विजिबिलिटी (Revenue Visibility) दर्शाता है। इंडस्ट्रियल, ऑटोमोटिव और स्मार्ट मीटरिंग जैसे सेगमेंट्स इस ग्रोथ के पीछे मुख्य रहे हैं।
हालांकि, यह मजबूत ऑर्डर बुक कंपनी की उम्मीदों के मुताबिक परफॉरमेंस नहीं दिखा पाई। Q3 FY26 में रेवेन्यू 22% YoY बढ़कर ₹804 करोड़ रहा, जो मार्केट की उम्मीदों से कम था। इसका मुख्य कारण इंडस्ट्रियल और रेलवे सेगमेंट्स में एग्जीक्यूशन में देरी और प्रोजेक्ट्स का टलना रहा। खास तौर पर, रेलवे सेगमेंट में KAVACH प्रोजेक्ट का स्थगित होना एक बड़ा कारण बना। इंडस्ट्रियल वर्टिकल, जो कंपनी का सबसे बड़ा हिस्सा है, उसमें 4% YoY की गिरावट देखी गई।
इन एग्जीक्यूशन चुनौतियों को देखते हुए, मैनेजमेंट ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए अपने रेवेन्यू गाइडेंस को घटाकर ₹4,100 करोड़ कर दिया है, जो पहले ₹4,400-4,500 करोड़ था।
मार्जिन में सुधार और नए प्रोजेक्ट्स
इन सबके बीच, कंपनी ने ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margins) में 60 बेसिस पॉइंट्स का सुधार करते हुए इसे 14.8% तक पहुंचाया है। यह ऑपरेटिंग लेवरेज (Operating Leverage) और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स का नतीजा है।
रणनीतिक रूप से, Kaynes Technology बैकवर्ड इंटीग्रेशन (Backward Integration) पर काम कर रही है। Sanand स्थित OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) फैसिलिटी Q4 FY26 तक कमर्शियल प्रोडक्शन (Commercial Production) शुरू कर देगी, जिसमें तीन क्लाइंट्स पहले से जुड़ चुके हैं। वहीं, Chennai में HDI PCB (High-Density Interconnect Printed Circuit Board) फैसिलिटी Q2 FY27 तक शुरू हो सकती है। इन पहलों से मार्जिन में सुधार और बाहरी सप्लायर्स पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
कनाडा की August Electronics के अधिग्रहण से कंपनी की नॉर्थ अमेरिकन मार्केट में मौजूदगी बढ़ी है। ऑटोमोटिव सेगमेंट ने भी 44% YoY ग्रोथ दर्ज की है, जो EV एडॉप्शन और एक्सपोर्ट डिमांड से प्रेरित है।
वर्किंग कैपिटल और कैश फ्लो पर दबाव
रणनीतिक विस्तार के बावजूद, Kaynes Technology वर्किंग कैपिटल (Working Capital) को लेकर चुनौती का सामना कर रही है। Q3 FY26 में नेट वर्किंग कैपिटल बढ़कर लगभग 139 दिन हो गया, जिसका मुख्य कारण रिसिवेबल्स (Receivables) और सप्लाई चेन की अनिश्चितता से निपटने के लिए इन्वेंटरी (Inventory) में की गई बढ़ोतरी है।
कंपनी मार्च 2026 तक इसे घटाकर 85 दिन के स्तर पर लाने का लक्ष्य रखती है। इसके लिए Q4 की प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाना, सप्लाई चेन फाइनेंसिंग (Supply Chain Financing) और कलेक्शन एफिशिएंसी (Collection Efficiency) में सुधार जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। कंपनी FY26 के अंत तक पॉजिटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो (Operating Cash Flow) बनाने का लक्ष्य रखती है।
हालांकि, Sanand OSAT प्लांट जैसे नए प्रोजेक्ट्स के लिए आवश्यक बड़ा कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) (लगभग ₹3,300 करोड़) फंडिंग और इंटरनल कैश जनरेशन की स्थिरता पर सवाल खड़े करता है। कंपनी का नेट डेट (Net Debt) भी बढ़कर Q3 FY26 तक ₹660 करोड़ हो गया है।
सेक्टर की ग्रोथ और आगे की राह
Kaynes Technology भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) सेक्टर का हिस्सा है, जिसके 2030 तक USD 155 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। सरकारी PLI स्कीम्स इस सेक्टर को बड़ा बूस्ट दे रही हैं।
बाजार विश्लेषकों (Analyst Consensus) का झुकाव 'Buy' रेटिंग की ओर है, जिनका औसत 12-महीने का टारगेट प्राइस ₹5,140-5,544 है। लेकिन, शेयर में अक्टूबर 2025 के अपने उच्चतम स्तर से लगभग 50% की गिरावट आई है, जो एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risks) को दर्शाता है।
कंपनी का 2028 तक $1 बिलियन रेवेन्यू का लक्ष्य हासिल करना काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि वह अपने मजबूत ऑर्डर बुक को रेवेन्यू में कैसे बदल पाती है और एग्जीक्यूशन व कैश फ्लो में निरंतर सुधार कैसे दिखाती है। निकट भविष्य में, कंपनी की वर्किंग कैपिटल को मैनेज करने, डेट कम करने और अपने रिवाइज्ड गाइडेंस को पूरा करने की क्षमता पर निवेशकों की कड़ी नजर रहेगी।